Abram Shouted At Photographers For No Pictures

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

मैनपुरी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में डेढ़ दर्जन से अधिक बस यात्रियों की मौत के बाद आखिर सरकार की नींद टूटती दिख रही हैं। हादसे के बाद बुधवार को परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सख्त दिखे और परिवहन अधिकारियों को जमकर फटकारा। इसके साथ ही परिवहन अधिकारियों को सड़क पर लगने वाले अवैध स्टैंड तथा अवैध वाहनों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसके लिए हर संभाग में टीमें गठित करने तथा पुलिस के साथ संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। सवाल यह है कि मुस्तैद परिवहन अधिकारी कैसे कार्रवाई करेंगे। इसकी वजह भी साफ है।  

मगर हकीकत अगले 24 घंटे में राजधानी में दिख सामने आ गई। राजधानी में परिवहन मंत्री तथा परिवहन आयुक्त के आदेश के बावजूद कार्रवाई तो दूर प्रवर्तन दल के अधिकारी दफ्तरों से बाहर निकले तक नहीं। पुलिस से क्या संपर्क हुआ, इसकी जानकारी देने वाला भी कोई नहीं था। मुख्यालय पर भी इसकी जानकारी नहीं थी। इतना ही नहीं संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) विदिशा सिंह को इस बावत कई बार फोन किया गया लेकिन उनका फोन तक नहीं उठा।

अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन बीके सिंह ने बताया कि सभी प्रवर्तन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध वाहनों की जांच कर उन्हें बंद करें या चालान करें। इसके साथ ही जहां पर सड़क पर पार्किंग के कारण यातायात अवरुद्ध हो रहा है, वहां पर अभियान चलाकर चालान करें और कार्रवाई करें। इस तरह की पार्किंग पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस का सहयोग लिया जाएं। इसके बाद भी अधिकारी अगल शिथिलता बरतते मिलें तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि राजधानी सहित सभी संभागों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।

ओवरलोड और अंडर लोड को भिड़े अधिकारी

ओवरलोड वाहनों को लेकर परिवहन विभाग के अधिकारी कितने संजीदा है, इसका नजारा गुरुवार को गोरखपुर में सामने आया। जहां पर आरटीओ डीडी मिश्रा और एक लोकल ट्रांसपोर्टर ओवर लोड वाहनों पर कार्रवाई को लेकर भिड़े रहें। शिकायत कर्ता वाहनों को ओवरलोड बता रहा था जबकि आरटीओ अंडरलोड करार दे रहे थे। मामला मुख्यालय तक पुहंचा। ट्रांसपोर्टर का आरोप था कि आरटीओ ने कई ओवर लोड ट्रक विवाद के चलते भगा दिए। मामला संज्ञान में आने के बाद अपर परिवहन आयुक्त के संज्ञान में आया तो उन्होंने वाहनों का वजन कराने तथा उसके आधार पर ओवरलोड या अंडर लोड करार देने को कहा। इसकी पूरी रिपोर्ट मुख्यालय प्रेषित करने के आदेश दिए हैं।

राजधानी में ही जांच का खेल

सरकार और मंत्री के आदेश को लेकर परिवहन विभाग के अधिकारी कितने गंभीर है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मैनपुरी में सोमवार को हुआ हादसा है। खास बात यह है कि डग्गामार सवारी वाहनों को लेकर परिवहन विभाग का अभियान चल रहा है और ऐसे में यह प्राइवेट टूरिस्ट बस कैसे बिना जांच के गुजर गई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जबकि बस आगरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी तक पहुंच गई लेकिन कहीं प्रवर्तन दल ने इसकी जांच नहीं की। सवाल यह है कि क्या इसमें संबंधित संभाग के अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय होगी। यही कुछ हाल राजधानी में स्कूल वाहनो की जांच में देखने को मिला था। यहां पर साठ फीसदी स्कूली वाहनों की जांच कागजों पर दिखाई दी गई लेकिन इन साठ फीसदी वाहनों में अनुबंध पत्र कितने में थे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अपर परिवहन आयुक्त ने भी कार्रवाई का दम भरा था लेकिन अब उसकी भी हवा निकल चुकी है।

 

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