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दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।  

 

प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ता सरकारी बकायेदारों की करनी का फल भुगत रहे हैं। दरअसल सरकारी विभागों पर दस हजार करोड़ से अधिक की बकायेदारी है लेकिन बिजली विभाग इन सरकारी महकमों से वसूली के बजाए छोटे उपभोक्ताओं पर लाठी चला रहा है। जबकि पावर कार्पोरेशन अपने सरकारी बकाये को ही वसूल ले काफी हद तक घाटा कम हो जाएगा।

 

दरअसल केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर में सरकारी विभागों की बकायेदारी में उत्तर प्रदेश पहले स्थान हैं। उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और उसके बाद केरल तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में सरकारी विभागों पर करीब 10 हजार 722 करोड़ की बकायेदारी है। इसमें करीब 1850 करोड़ की बकायेदारी मार्च 2017 से दिसंबर 2017 के बीच ही बढ़ गई। ऐसे में सवाल यह है कि सरकारी विभागों से जब वसूली नहीं की जा रही है तो फिर छोटे उपभोक्ताओं को बकाया वसूली के नाम पर क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है। इसका जवाब पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों के पास भी नहीं है।

उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक पावर कार्पोरेशन हर साल बढ़त घाटे का हवाला देकर बिजली की दरों में इजाफा कर देता है। जबकि सरकारी विभागों की वसूली पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। नतीजतन घाटे में लगातार इजाफा हो रहा है। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री को ज्ञापन देकर उनसे सरकारी विभागों की बकायेदारी समाप्त कराने को कहा गया है।

 

सरकारी वसूली में भी व्यवधान

बिजली विभाग की बकायेदारी में सरकारी अधिकारियों के बंगले और दफ्तर सबसे ऊपर है। पिछले दिनों निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान राजधानी में ही बटलर पैलेस कालोनी, डालीबाग सहित कई राज्य संपत्ति विभाग की कालोनियों में बिजली के कनेक्शन काटे गए लेकिन बाद में शासन और कार्पोरेशन के शीर्ष अधिकारियों के निर्देश पर बिजली कनेक्शन जोड़ भी दिए गए। इसके उलट आम उपभोक्ता के बकाया होने पर बिजली विभाग के तमाम अभियंता मुकदमा तक दर्ज कराने में पीछे नहीं है।  

हर सरकार में रहे खास

सरकारी कालोनियां और दफ्तर हर सरकार के कार्यकाल में खास बने रहें। अव्वल बिजली विभाग के अभियंता यहां तक पहुंच नहीं पाए। पहुंचे भी तो उन्हें मुंह की खानी पड़ी। वर्तमान में वीआईपी इलाकों में सरकारी बंगलों में रहने वाले तमाम माननीयों और अफसरों के घरों पर लाखों रुपये की बकायेदारी है मगर उनके कनेक्शन काटने या वसूली की फिक्र सरकार को है न बिजली विभाग को। केवल आम उपभोक्ताओं पर दबाव बनाकर उनके जरिए राजस्व बढ़ाने कवायद की जा रही है।

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