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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लगने के बाद भी धड़ल्ले से चल रही टैक्सचोरी के खिलाफ कामर्शियल टैक्स ने सख्त रुख अपना लिया है। इसी कड़ी में अब विभाग के निशाने पर मिठाई और रेस्त्रां पर विभाग ने नजरें टेढ़ी कर लीं है। दरअसल वैवाहिक कार्यक्रमों  और अन्य आयोजनों में तमाम इवेंट कंपनियां, रेस्त्रां आदि शामिल रहते हैं लेकिन  पूरा काम नगद का होता है। कहीं कोई लेनदेन रिकार्ड पर नहीं होता है। लिहाजा सरकार को भी रत्ती भर टैक्स नहीं मिलता है।

 

दरअसल राजधानी में रेस्त्रां, गेस्टहाउस, बारात घरों और होटलों में जमकर टैक्सचोरी का खेल चल रहा है। सरकार कितने भी दावा करें, लेकिन हकीकत में किसी मिठाई दुकानों, रेस्त्रां आदि में कोई बिल नहीं जारी हो रहा है। अशोक मार्ग पर श्रीराम टावर के नजदीक स्थित होटल में तो कभी डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भी बिल नहीं लिया जाता है। महीनों से यहां पर मशीन खराब है और आने वालों से नगद ही भुगतान करने को कहा जाता है। इसी तरह से निराला नगर में चल रहे तमाम गेस्ट हाउसों में भी यही खेल चल रहा है। यहां पर सजावट से लेकर कैटरिंग तक पूरा काम किया जाता है लेकिन रसीद केवल बैंक्वेट की बुकिंग की दी जाती है। बाकी का काम नगद पर होता है। यह सारा लेनदेन न किताबों में आता है और हिसाब में।

अपंजीकृत दुकानदार भी वसूल रहे टैक्स

टैक्सचोरी का मायाजाल इतना सुनियोजित है कि तमाम ऐसे रेस्त्रां जो स्वयं ही पंजीकृत नहीं है या फिर समाधान योजना के तहत हैं, वहां भी लोगों से पूरा टैक्स वसूला जा रहा है। इनके द्वारा वसूला जाने वाला पूरा टैक्स मुनाफे की तौर पर कारोबारी की ही जेब में चला जाता है। यानी जनता की जेब से निकला टैक्स भी मुनाफे में तब्दील हो रहा है। वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी के अधिकारी भी मानते हैं कि तमाम रेस्त्रां में मिठाई शाप, चाट व अन्य सामानों की बिक्री की जा रही है लेकिन इसके लेनदेन का कोई रिकार्ड नहीं होता है। बिल नाम पर यहां केवल इलेक्ट्रानिक कैलकुलेटर की पर्ची दी जाती है।

 

खुलेआम नियमों का उल्लंघन

दरअसल वैट लगने के बाद ही इलेक्ट्रानिक कैलकुलेटर के लिए पंजीयन नंबर और उसे आनलाइन करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन अधिकारियों की शिथिलता के चलते ऐसा कुछ नहीं हुआ। कैलकुलेटर में भी टर्नओवर कारोबारी केवल हिसाब से तय करते हैं। इस कारण से वास्तविक बिक्री के साठ –सत्तर गुना कम बिक्री ही दिखाई जाती है। साक्ष्य के अभाव में विभाग भी उन्हीं आंकड़ों को सही मानते हैं। नतीजा यह है कि सरकार को मिलने वाले टैक्स से कई गुना टैक्स कारोबारियों की जेब में पहुंच रहा है।

बिलिंग साफ्टवेयर ही सेट

सरकार भले ही बिलिंग को लेकर तमाम व्यवस्था कर रही है लेकिन इसकी आड़ में बिलिंग साफ्टवेयर का धंधा भी जोरों पर है। तमाम कंपनियां बिलिंग साफ्टवेयर कारोबारियों को दे रही है। इन साफ्टवेयर में डेटा डिलीट करने का भी प्रावधान रहता है। यानी सुविधा के मुताबिक टर्नओवर। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लगने के बाद के बाद इन साफ्टवेयर की कीमत भी बढ़ गई। टैक्स का बड़ा हिस्सा हजम करने के लिए कारोबारी भी इन साफ्टवेयर के लिए ज्यादा पैसा देने को तैयार हैं।

 

कई स्थानों पर हुई जांच – छापेमारी

टैक्स चोरी की आशंका में राजधानी में कामर्शिलय टैक्स विभाग द्वारा कई स्थानों पर छापेमारी की गई। गुरुवार को इसीक्रम में अलीगंज में एक रेस्त्रां सहित कई मिठाई दुकानों पर छापामार कर जांच की गई। जांच में करोड़ों रुपये की टैक्सचोरी भी पकड़ी गई। हालांकि अधिकारी सारे दस्तावेजों की जांच के बाद वास्तविक टैक्सचोरी का विवरण देने का दावा कर रहे हैं।

 

 

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