Box Office Collection of Dhadak and Student of The Year

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

कहीं पता, कहीं से उम्र और दलालों को पैसा। बस वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की यह सबसे प्रचलित जुगाड़ है। भले विभाग लाइसेंस धारकों की शिनाख्त के लिए तमाम नए नियम बना रही है लेकिन फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मगर अब इस पर लगाम लगने की पूरी संभावना है। दरअसल परिवहन विभाग अब लाइसेंस को भी आधार कार्ड से लिंक करेगा। यानी आवास से लेकर जन्मतिथि और फिंगर प्रिंट तक का मिलान डाटाबेस से होगा और उसके बाद लोगों को फर्जी लाइसेंस नहीं बन सकेंगे।

परिवहन अधिकारियों ने बताया कि आधार कार्ड से लाइसेंस के लिए अब आधार कार्ड भी अनिवार्य किया जा रहा है, इसका मसौदा तैयार है और जल्द ही इस पर फैसला कर लिया जाएगा। नए लाइसेंस के लिए आधार कार्ड होना अनिवार्य होगा जबकि पुराने लाइसेंस धारकों को भी अपने आधार से ड्राइविंग लाइसेंस को लिंक कराना होगा। इसके लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी।

 

रुकेगा फर्जीवाड़ा

परिवहन अधिकारियों के मुताबिक आधार लिंक होने के बाद लोगों को भी काफी सुविधाएं मिलेंगी। एक तरफ जहां फर्जी लाइसेंस बनना बंद हो जाएगा, वहीं पासपोर्ट या पैन कार्ड के आवेदन के वक्त भी औपचारिकताएं कम हो जाएंगी। इसके अलावा सभी वाहनों चालकों का डाटाबेस भी विभाग के जरिए सरकार के पास मौजूद रहेगा। वह भी फिंगर प्रिंट और रेटिना के साथ। यानी फारेंसिक जांच में मिलने वाले छोटे से साक्ष्य से ही अपराधी या दोषी तक पहुंच आसान हो जाएगी। इसके अलावा आवेदन करने वाले का भी सत्यापन फार्म की फीडिंग के साथ हो जाएगी। अभी तक आवेदक के सत्यापन के लिए कई तरह के विकल्प है। इसी फायदा उठा कर दलाल अपना काम कर जाते हैं।

सामने रहेगा पूरा रिकार्ड

आधार से लिंक होने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आवेदक का नाम व आधार नंबर डालते ही उसकी पूरी लाइसेंस हिस्ट्री सामने आ जाएगी। यानी अगर चालक से कभी लर्निंग आवेदन किया होगा या फिर लर्निंग लाइसेंस बनवाने के बाद स्थायी लाइसेंस बनवाने नहीं पहुंचा। दरअसल ई रिक्शा के प्रकरण में कुछ इसी तरह की मामला देखने को मिल रहा है। जहां रिक्शा खरीदने के लिए कंपनी व दलालों ने लर्निंग लाइसेंस बनवा कर रिक्शा बेच दी लेकिन उसके बाद चालक अपना लाइसेंस तक स्थायी तक कराने नहीं पहुंचे। नतीजा यह है कि करीब साढ़े पंद्रह हजार पंजीकृत बैट्री रिक्शा के सापेक्ष में एक तिहाई यानी साढ़े पांच हजार भी स्थायी लाइसेंस नहीं है। अब ये लर्निंग लाइसेंस के आवेदक विभाग को भी खोजे नहीं मिल रहे हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आधार अनिवार्य किए जाने से लाइसेंस की आड़ में होने वाला फर्जीवाड़ा काफी हद तक कम हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि गलत सूचना देकर लाइसेंस हासिल करने वालों को आगे काफी दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी और लोग ऐसा करने से कतराएंगे।

अशोक कुमार

संभागीय परिवहन अधिकारी

 

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