Box Office Collection of Dhadak and Student of The Year

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

राजधानी में बन रहा अंतरराष्ट्रीय आलमबाग बस अड्डा रोडवेज के लिए कागजी मुनाफा साबित हो रहा है जबकि हकीकत में इसके निर्माण में बस अड्डा बनाने वाली एजेंसी ही पूरा लाभ उठा रही है। आलम यह है कि बस अड्डे के निर्माण के वक्त हर वक्त लाभ मिलने का दम भरने वाले अधिकारी अब इससे पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। अधिकारी एक दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं और आम लोग चारबाग से आलमबाग तक ट्रैफिक समस्या झेल रहे हैं। आलमबाग बस अड्डे के निर्माण को पूरा कर उसके संचालन की मियाद भी पूरी हो चुकी है लेकिन एजेंसी से न पेनाल्टी वसूली जा रही है न ही बसों का संचालन हो रहा है।

 

निर्माता कंपनी के प्रति अधिकारी कितने वफादार हैं, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि बस अडडे के निर्माण के वक्त अनुबंध से लेकर उसके पूरा होने तक का अनुबंध करने वाले प्रधान प्रबंधक अतुल भारती पहले हर हालत में रोडवेज में को फायदा होने का दावा करते रहें। बाद में करीब आठ महीने पहले बस अड्डे के निर्माण की मियाद को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया। इसके वजह मेट्रो निर्माण तथा ज्यादा मानसून को बताया गया। अर्थात अक्टूबर में चालू होने के स्थान पर आलमबाग बस अड्डा जनवरी के प्रथम पक्ष में शुरू हो जाना चाहिए था। उसके बाद फिर खेल हुआ। इस बार बस के यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कुछ मोहलत देने की सहमति बन गई।

ऐसे में अहम सवाल यह है कि बस अड्डे का निर्माण करने वाली एजेंसी को क्या मालूम नहीं था, कि राजधानी लखनऊ में किन महीनों में बारिश होती है। मानसून सक्रिय रहता है। इसी तरह से अगर निकासी गेट सुरक्षित नहीं था तो फिर बस अड्डे के नक्शे को कैसे स्वीकृति प्रदान की गई। उस वक्त नक्शे का परीक्षण करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

 

मुनाफे के गणित में भ्रष्टाचार का छौंका

दरअसल आलमबाग बस अड्डे को हाईटेक व अत्याधुनिक बनाने के लिए बीओटी माडल (बिल्ड एंड आपरेट) पर तैयार कराया जा रहा है। इसके तहत बस अड्डे के निर्मित करने संचालित करने तथा वहां पर माल व व्यावसायिक भवन का निर्माण एजेंसी को ही करना था। इस पर होने वाला करीब दो अरब का व्यय कंपनी को करना था। रोडवेज का फायदा यह था कि अनुबंध के मुताबिक अक्टूबर 2017 में पूरा होना था और बस अड्डा पूरा न होने पर प्रतिदिन के हिसाब से लाखों रुपये पेनाल्टी का प्रावधान था। मगर समय पूरा होने से पहले रोडवेज के पूर्व प्रबंध निदेशक रवींद्र नायक ने मौसम आदि कारणों से मियाद को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया। उसके बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। अब बस अड्डा कब बनकर संचालन में आएगा, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। उधर, इस संबंध में रोडवेज के प्रबंध निदेशक गुरुप्रसाद से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो राजधानी से बाहर होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकीं।

अधिकारी एक दूसरे को बता रहे जिम्मेदार

खास बात यह है कि आलमबाग बस अड्डे के निर्माण के समय से ही इसे हर तरह से मुनाफे का सौदा करार देने वाले प्रधान प्रबंधक अतुल भारती अब इसका चार्ज ही अपने पास न होने की दलील देते हैं। उनके मुताबिक यह काम मुख्यालय पर तैनात दूसरे प्रधान प्रबंधक अनघ मिश्रा देख रहे हैं लेकिन वह भी इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकें।

 

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