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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

राम नाम जपना, पराया काम अपना। दरअसल इस कमेंट के साथ अपना पुराना ट्विट पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया है। अखिलेश यादव ने इस कमेंट के जरिए प्रदेश की भाजपा सरकार तथा प्रधानमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी चुटकी ली है। दरअसल इस कमेंट के जरिए उन्होंने यह दर्शाने का भी प्रयास किया है कि जो काम उनके समय शुरू हुए। जिनका शिलान्यास उन्होंने किया, अनुमति उन्होंने हासिल की, अब पूरा होने पर उनका क्रेडिट दूसरे बटोरने में लगे हैं।

 

दरअसल दिल्ली को नोएडा से जोड़ने के लिए मजेंटा लाइन मेट्रो सेवा का उद्घाटन 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा तक मेट्रो की उपलब्धि भाजपा के खाते में दर्ज कराने की मशक्कत कर रहे हैं। जबकि प्रदेश में मेट्रो को लाने का क्रेडिट न मिलने से आहत पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार इस पर तंज कस रहे हैं। दरअसल समाजवादी पार्टी शुरू से ही भाजपा पर उनके विकास कार्यो को हाईजैक करने का आरोप लगाती रही है। आगरा एक्सप्रेस वे से लेकर गोमती रिवर फ्रंट, राजधानी में हेरीटेज जोन और जेपीएनआई व सीजी सिटी सरीखे प्रोजेक्ट पूर्ववर्ती समाजवादी सरकार के समय के हैं।

इनमें कई प्रोजेक्ट पूर्व मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार थे। मेट्रो भी उनमें एक था। जानकारों के मुताबिक राजधानी में मेट्रो लाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के प्रयास कहीं से नजर अंदाज नहीं किए जा सकते हैं और इसी कारण से राजधानी में प्रथम चरण में मेट्रो रिकार्ड समय चल भी गई। इसके ट्रायल रन का उद्घाटन भी हुआ। अलबत्ता इतना जरूर रहा कि कामर्शियल रन के वक्त तक समाजवादी पार्टी की सरकार जा चुकी थी और भाजपा सत्तारुढ़ हो चुकी थी। इस कारण से भाजपा ने भी मेट्रो का क्रेडिट हासिल करने में कोई कोर कसर नहीं बाकी रखीं।

 

इसी क्रम में नोएडा में शुरू होने जा रही मजेंटा लाइन मेट्रो भी है। इसका काम भी पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के वक्त में ही शुरू हुआ था। काम पूरा होने तक वह मुख्यमंत्री नहीं रहे और अब योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री है। लिहाजा पूर्व मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर तंज कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली –नोएडा के बीच मजेंटा लाइन मेट्रो का शिलान्यास 2016 और उसके पहले वर्ष 2014 में उसकी मंजूरी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में मिली थी। मगर अब सारा दृश्य बदल चुका है। मेट्रो संचालन के वक्त मुख्यमंत्री की कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ है और लिहाजा संचालन का क्रेडिट भी उन्हीं के खाते में जाता दिख रहा है।

 

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