Thugs of Hindostan Katrina Kaif Look Motion Poster Released

दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

कर्नाटक में भाजपा को बढ़त और सरकार बनने के कयासों के बीच शुरु हुआ जश्न राजधानी में कुछ घंटे भी नहीं चल पाया। शुरुआत के पहले घंटे के बाद से सरकार बनाती दिख रही भारतीय जनता पार्टी जादुई आकंड़े के नजदीक तो पहुंची लेकिन उसे पा नहीं सकीं। वहीं कांग्रेस से जनता दल सेक्युलर का समर्थन करते हुए पूरी बाजी को दिलचस्प बना दिया। चुनावी नतीजे यूपी से करीब हजार किलोमीटर दूर कर्नाटक के थे लेकिन इससे सियासी पारा राजधानी में चढ़ उतर रहा था। भारतीय जनता पार्टी कार्यालय पर कुछ यही देखने को मिल रहा था। कर्नाटक जीत का दम भरने वाले भाजपा नेता केवल अपनी सरकार बनाने के कयास लगाते जरूर दिखाई दिए लेकिन हकीकत में कुछ घंटों तक चला जश्न और उत्साह जरूर फीका पड़ गया।

 

दोपहर करीब 12.30 बजे ही भाजपा कार्यकर्ता जीत के उत्साह में कांग्रेस मुक्त भारत का जयघोष कर रहे थे। ज्येष्ट माह के तीसरे बड़े मंगल पर कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनने का जश्न भी शुरू हो गया था। काकोरी स्थित आतिशबाजी की दुकानों से पटाखे आ गए। कई मंत्री राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री को योगी का श्रेय दे रहे थे। जयघोष लग रहे थे लेकिन अपरान्ह ढाई बजे के करीब यह सारा उत्साह धीरे धीरे उतरने लगा। वजह यह थी कि भाजपा बहुमत से पिछड़ गई और दूसरी तरफ कांग्रेस ने भाजपा पर उसी का दांव चल दिया। यानी जनता दल (सेक्युलर) के कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर गठबंधन की घोषणा कर दी। कांग्रेस के इस दांव से भाजपा के पास भी सीमित विकल्प बचे। विकल्प यानी कांग्रेस या फिर जनता दल (एस) में विघटन। देर शाम तक इसका असर दिखने लगा।

आए मगर फूटे नहीं पटाखे

विधानसभा मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय पर कर्नाटक की जीत की खुशी में पटाखे तो खूब आए लेकिन जल नहीं पाएं। दरअसल पटाखे मंगाए जाने तक कर्नाटक को भाजपा की सरकार बनती दिख रही थी। बहुमत मिलना भी तय माना जा रहा था लेकिन पटाखों के दफ्तर पहुंचने तक सारा दृश्य बदल चुका था। कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन भी तय हो गया था और महज कुछ सीटों के कारण भाजपा के हाथ आई जीत भी फिसलती दिख रही थी। लिहाजा जश्न भी टल गया। हालांकि कार्यकर्ता हर हाल में सरकार बनाने का दावा जरूर करते दिखाई दिए।

 

अपने ही दांव से भाजपा चित्त

गोवा, मेघालय में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए जो दांव खेला था, मंगलवार को उसी का शिकार हो गई। दरअसल भाजपा की सीटें बहुमत से कम होने की बात तय होते ही कांग्रेस ने जेडीएस के साथ अपने गठबंधन और कुमार स्वामी को सशर्त समर्थन की घोषणा कर दी। भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के बाद अन्य के खाते में महज दो सीटें होने के कारण फिलवक्त भाजपा के सामने अब सरकार बनाने के बहुमत का कोई ठोस आधार भी नहीं दिख रहा। अब सरकार उसी सूरत में बन सकती है कि जेडीएस या कांग्रेस में टूट हो। जबकि कुमार स्वामी के पास कांग्रेस से समर्थन पत्र के साथ ही बहुमत के लिए जरूरी 112 से ज्यादा विधायक हो गए हैं। इसका समर्थन पत्र और दावा भी शाम होते होते राज्यपाल के पहुंच गया। ऐसे में राज्यपाल किसे आमंत्रित करेंगे यह देखना भी कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

उपचुनाव में बढ़ी दिक्कत

कर्नाटक के नतीजों के बाद प्रदेश में कैराना व नूरपुर में होने वाले उपचुनाव को लेकर सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी की दिक्कत बढ़ती दिख रही हैं। मौजूदा हालात में अब कांग्रेस के भी संयुक्त विपक्ष में शामिल होने की उम्मीदें बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजपार्टी और रालोद पहले ही संयुक्त प्रत्याशी उतार रहे हैं। अब देखने वाली बात यह है कि चुनाव में कांग्रेस का स्टैंड क्या रहेगा। अगर कांग्रेस भी भाजपा के खिलाफ चुनाव में अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ आती है तो फिर भाजपा के लिए इन सीटों को निकालना मुश्किल होगा। यही नहीं, इन दो उपचुनाव से आने वाले समय में झारखंड, मध्यप्रदेश और राजस्थान में होने वाले चुनावों की जमीन भी तैयार होगी।

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