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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

करवां गुजर गया गुबार देखते रहें . . ।

 

निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद विपक्षी दलों की हालत कुछ इसी तरह से दिख रही है। दरअसल चुनावों में ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर तकरार कुछ ज्यादा तेज होती दिख रही है। हालांकि ईवीएम को लेकर सवाल बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने खड़े किए थे लेकिन अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित पूरी पार्टी ईवीएम को लेकर सवाल उठा रही है। यही नहीं, ईवीएम पर संदेह जताने के बाद भारतीय जनता पार्टी द्वारा बसपा के निर्वाचिच मेयरों का इस्तीफा मांग कर बैलेट द्वारा चुनाव कराए जाने की प्रतिक्रिया पर समाजवादी पार्टी ने हमला किया है।

 

दरअसल निकाय चुनाव में ईवीएम की निष्पक्षता परिणामों से ही झलकती है या यूं कहें नतीजे ही ईवीएम पर सवाल खड़े कर देती है। राजधानी में ही भारतीय जनता पार्टी ने 110 वार्ड में 58 फतेह कर लिए। भाजपा की मेयर प्रत्याशी भी  भी बड़े अंतर से जीत गईं मगर राजधानी से महज पंद्रह किमी की दूरी पर स्थित नगर पंचायतों में परिणाम भाजपा के खिलाफ हो गए। आठ में सात नगर पंचायतें भाजपा हार गई। केवल बीकेटी में ही भाजपा सफलता मिली जबकि इन नगर पंचायतों का पचास फीसद इलाका अब शहरी श्रेणी में है। फिर भाजपा की लहर कैसे लुप्त हो गई। बैलेट और ईवीएम के नतीजे भी भाजपा के जीत अंतर को बता देते हैं। ईवीएम से वोटिंग में भाजपा को जहां सफलता मिली, बैलेट में वही हारती नजर आई। सवाल यह है कि अगर भाजपा की लहर चल रही थी तो फिर नतीजों में इतना अंतर कैसे रहा।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने तो ईवीएम के जरिए भाजपा पर निकाय चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तो शुरू से ही निकाय चुनाव में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग की निष्ठा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयुक्त को पहले ही इस बावत आगाह किया था लेकिन निर्वाचन आयोग भाजपा के पक्ष में ही काम करता रहा।

विरोध में भी पारिवारिक होड़

 

बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। मगर समाजवादी पार्टी की पारिवारिक कलह यहां पर दिखाई दे रही है। पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने ईवीएम को लेकर लग रहे आरोपों पर कहा कि इसका कोई पुख्ता साक्ष्य मिले तो आरोप माने जा सकते हैं। शिवपाल के इस तर्क के बाद समाजवादी पार्टी की सारी मशक्कत फिर बेअसर दिखाई दे रही है। हालांकि सियासी हलकों में शिवपाल के इस बयान को कई लिहाज से देखा जा रहा है।

गुजरात में भी दिखेगी ईवीएम की जीत

 

विपक्षी सियासी दल भले ही चुनावी नतीजों के लिए ईवीएम पर ठीकरा फोड़ रहे हैं तो लेकिन भाजपा ने इस जीत को गुजरात में भुनाने की कवायद तेज कर दी है। प्रदेश में भाजपा के विजयी मेयर गुजरात जाकर वहां चुनाव में भाजपा का प्रचार करेंगे। ऐसे में ईवीएम को लेकर गुजरात में चर्चा होना भी स्वाभाविक दिखाई  दे रहा है। दरअसल अगले चार दिन तक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुजरात में चुनाव प्रचार करेंगे। इसी तरह से मंगलवार को बहुजन समाजपार्टी अध्यक्ष मायावती भी गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच रही है। ऐसे में भाजपा की जीत का जिक्र होगा तो ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना लाजिमी है। उसके बाद भारत निर्वाचन आयोग का रुख भी देखने वाला होगा।

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