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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।  

 

रोडवेज में ईटीएम मशीनों की फार्मेटिंग कर लाखों रुपये डकारने वाले विभाग के दागियों की पोल मशीनें ही खोलेंगी। इसके लिए संदिग्ध मशीनों की चिप निकाल कर उन्हें डीकोड कराया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि मशीनों में जो भी हेराफेरी की गई है, वह चिप में सुरक्षित है और उसके जरिए सारी कारस्तानी सामने आ जाएगी। खास बात यह है कि ईटीएम में फार्मेटिंग के जरिए प्रदेश में रोजाना एक करोड़ रुपये अधिक का गबन हो रहा है। इसमें कई प्रभावशाली श्रमिक नेता व अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

 

उल्लेखनीय है कि सायबर कैफे में ईटीएम की फार्मेटिंग कर यात्री व आय को कम दिखाने के खेल का भंडाफोड़ दि राइजिंग न्यूज किया था। इसके बाद से ही राजधानी सहित प्रदेश के कई जिलों में अधिकारियों में हड़कंप है। दरअसल, यह खेल साय़बर कैफे के जरिए चल रहा है। खास बात यह है कि इस मामले में रोडवेज के अधिकारी भी पूरी तौर पर शामिल हैं और इसमें जब कभी इस पूरे गोरखधंधे की शिकायत हुई या सूचना मिली तो शिकायत कर्ता को ही सजा दे दी गई। खेल बदस्तूर जारी रहा। मामला सामने आने के बाद अब अधिकारी व इस गोरखधंधे में शामिल कर्मचारी भी सकते में है। रोडवेज के मुख्य महाप्रबंधक एचएस गाबा ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए है। उधर रोजडवेज में सेवा प्रदाता कंपनी ट्राइमैक्स द्वारा भी मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

ट्राइमैक्स के प्रभारी अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर गोपनीय तरीके से जांच शुरू कर दी गई है और कुछ मशीनों को चिन्हित किया गया है। इनके चिप निकाल उन्हें जांच के लिए कंपनी के मुख्यालय भेजा जा रहा है। इसके अलावा जो कुछ जानकारियां मिल रहीं है, उनका परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे गोरखधंधे में किसी कंपनी के पूर्व कर्मचारी की भूमिका से भी इंकार नहीं किया है।

 

नौकरी संविदा कंडक्टरी और आलीशान घर व कार

रोडवेज में चल रहे गोरखधंधे की माया है कि संविदा पर नौकरी करने वाले कई परिचालक अलीशान मकान के मालिक बन गए हैं। कई तो ड्यूटी पर भी कार से पहुंच रहे हैं। जबकि उन्हें हर महीने बामुश्किल पंद्रह से बीस हजार रुपये पगार मिल रही है। कई बार तो महीनों पगार भी नहीं मिलती है मगर उनके ठाट –बाट अधिकारियों को भी ज्यादा हैं। वैसे भी इस तरह के कर्मचारी अपने विभाग में भी चर्चा में बने रहते हैं। सूत्रों की माने तो कई तो ऐसे हैं जिनके मकान राजधानी में ही बन रहे थे लेकिन पिछले दिनों मामलों का भंडाफोड़ होने के कारण निर्माण कार्य तक रुक गया है। दरअसल इस पूरे खेल में एक ट्रिप में आठ से 12 हजार रुपये का खेल हो जाता है। यही कमाई मौज-मस्ती व ठाटबाट का जरिया बन गई है।

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