Actor Varun Dhawan Speaks on relation With Natasha Dalal in Koffee With Karan

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

भारत पाकिस्तान बंटवारे के करीब 71 साल बाद एक बार फिर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर जंग शुरू हो गई है। शुरुआत हुई अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी (एएमयू) के छात्रसंघ भवन में लगी जिन्ना की तस्‍वीर से। दरअसल, पिछले दिनों भाजपा सासंद हरनाथ ने एएमयू में जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। उसके बाद ही जिन्ना की तस्वीर को लेकर सियासत गर्म हो गई।

खास बात यह है कि इसके पहले एएमयू राष्ट्रपति के आगमन को लेकर चर्चा में आया था जब छात्रसंघ ने उसका विरोध जताया था। अब जिन्ना को लेकर छात्रसंघ और भाजपा के संगठन आमने-सामने हैं।

दरअसल, मोहम्मद अली जिन्ना 1938 में एएमयू गए थे। उनके आगमन के बाद वहां पर उनकी तस्वीर लगाई गई थी। यह अभी तक चल रहा था। आजादी के करीब 71 साल बाद जिन्ना की तस्वीर को लेकर सियासत शुरू हो गई। भाजपा नेताओं का तर्क है कि जिन्ना की तस्वीर का एएमयू में औचित्य क्या है। आखिर उनसे छात्रों को कौन सी प्रेरणा मिल रही है। इसी को लेकर अब सियासत जोर पकड़ने लगी है। जबकि एएमयू छात्रसंघ जिन्ना की तस्वीर न हटाने की जिद पर अड़ा है। उनका तर्क जब जिन्ना आए थे, उस वक्त भारत अविभाजित था। जिन्ना भी नेता थे।

यह अलग बात है कि पाकिस्तान बनने के बाद वह पाकिस्तान के राष्ट्रपति हुए। उनकी तस्वीर भी उनके आगमन पर ही लगी थी, उनकी तरह से अन्य लोगों की तस्वीर लगी है। छात्रसंघ के पदाधिकारी इसे भारतीय जनता पार्टी की समाज भेद पैदा करने की साजिश करार दे रहे हैं।

उधर, जिन्ना के मुद्दे पर सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। बुधवार को हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता एएमयू पहुंचे को छात्र भी आ गए। हालात तनाव पूर्ण हो गए। मशक्कत के बाद पुलिस ने हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं को हटाया। उधर, पार्टी में सियासी गर्मी दिखने लगी है और सांसद व मंत्री आमने सामने आ गए हैं।

सांसद-मंत्री आमने-सामने

मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरनाथ तथा कबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य आमने सामने हैं। दरअसल, सांसद के पत्र के बाद उत्पन्न विवाद पर कबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि आजादी के आंदोलन में जिन्ना भी थे और इस तरह की बात किया जाना गलत है। स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान के बाद सांसद हरनाथ कबीना मंत्री के खिलाफ मुखर हो गए हैं। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य से माफी मांगने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है कि अगर वह माफी नहीं मांगते हैं, उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाएं। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा से मोह भंग हो रहा है।

पार्टी के लिए असहज स्थिति

पहले दलित आंदोलन व आरक्षण को लेकर उत्पन्न अंतर विरोध से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी के लिए अब जिन्ना का मुद्दा असहज हो गया है। दरअसल, 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सोशल इंजीनियरिंग में लगी पार्टी के लिए अब यह मुद्दा गले की हड्डी बनता जा रहा है। वहीं, अब अपने ही सांसद और मंत्री के एक-दूसरे पर हमलावर होने से स्थिति और ज्यादा असहज दिख रही है।

दरअसल, दो दिन पूर्व ही प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने रमजान में बिजली की निर्बाध आपूर्ति करने आदेश दिए थे। उन्होंने सहरी-इफ्तार के समय आपूर्ति एकदम चाक-चौबंद रखने को सरकार की प्राथमिकता करार दिया था। इसे मुस्लिमों को प्रभावित करने के लिए बड़ा कदम माना जा रहा था। कारण है कि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री तक बिजली को सियासत का माध्यम बनाने को समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला था।

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