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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

क्राइम मीटिंग की अध्यक्षता जिलाधिकारी द्वारा किए जाने के आदेश को लेकर आइपीएस और आइएएस एसोसिशएन एक बार फिर आमने सामने आ गए हैं। आइएएस एसोसिएशन इसे एक बेहतर कदम मान रही है तो आइपीएस एसोसिएशन इसे युवा पुलिस अधिकारियों को हतोत्साहित करने वाली कार्रवाई करार दे रही है। मुद्दे की संजीदगी इससे भी समझी जा सकती है कि मुख्य सचिव का आदेश जारी होने के बाद सोमवार को डीजीपी सुलखान सिंह ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए सरकार को पत्र भी भेजा है। गृह सचिव अरविंद सिंह ने भी डीजीपी का पत्र मिलने की बात स्वीकार की और उस पर सरकार के विचार करने की बात कही है। अब इसमें हो भले ही कुछ लेकिन आइपीएस और आइएएस फिर आमने-सामने हैं।


 

नाम न छापने की शर्त पर पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल नौकरशाहों द्वारा पुलिस अपने अधीन करने की प्लानिंग सरीखा है। इससे पुलिस अधिकारियों के अधिकार कम होंगे। दूसरी तरफ प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कहना है कि जिलाधिकारी जिले का नोडल अधिकारी होता है। ऐसे में अगर वह क्राइम की समीक्षा करेगा तो इससे स्थिति में सुधार ही होग। इसमें आपत्ति जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए। दरअससल, प्रदेश में पुलिस में कमिश्नरी लागू करने के प्रयास काफी वर्ष पूर्व हुए थे, लेकिन नौकरशाही ने उसे सफल नहीं होने दिया।

कारण यह है कि ऐसे में पुलिस कमिश्नर को कमिश्नर के बराबर मैजेटीरियल पावर मिल जाएगी। यानी कानून व्यवस्था या अमन शांति के लिए पुलिस अपने अधिकारी का उपयोग कर सकती है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई आदि कई राज्यों में यह व्यवस्था लागू है।

 

 

अधिकारों को लेकर टकराव

दरअसल पूरे विवाद की मूल जड़ अधिकार व प्रभाव है। फिलहाल पुलिस के मुकाबले डीएम के पास ज्यादा अधिकार हैं। हालांकि दोनों का कार्यक्षेत्र अलग है, इस कारण से टकराव नहीं होता है। अब अगर डीएम सीधे तौर पर पुलिस की समीक्षा करने लगेंगे तो पुलिस के मुकाबले उनके अधिकार में वृद्धि होगी। पुलिस अधिकारी भी डीएम के प्रति भी जवाबदेह हो जाएंगे। इस कारण से आइपीएस एसोसिएशन इस आदेश को सही नहीं मान रही है। वहीं आइएएस इस आदेश में कोई खराबी होने से ही इंकार कर रहे हैं।

 

 

आइपीएस एसोसिएशन का लगेगा जमावाड़ा

सरकार के नए आदेश के खिलाफ मंगलवार को आइपीएस एसोसिएशन ने अपनी बैठक आहूत की है। इस बैठक में सरकार के इस आदेश को लेकर विचार मंथन किया जाएगा। बैठक के बाद अगले कदम का निर्धारण भी किया जाएगा। इसके पूर्व प्रदेश के पुलिस प्रमुख ने सरकार को अपनी असहमति पहले ही जता दी है। ऐसे में आइपीएस और आइएएस एसोसिएशन के बीच यह टकराव फिलहाल बढ़ता ही दिखाई दे रहा है।

 

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