Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

अमीनाबाद में गूंगे नवाब पार्क के नजदीक करीब तीन महीने पहले लेसा की टीम ने एक  टेलरिंग दुकान पर बिजली की चोरी पकड़ी। जांच टीम को महज आठ गुणा आठ वर्गफीट की दुकान में एक मशीन डायरेक्ट चलती मिली लेकिन काबिल अभियंताओं ने इस मशीन के साथ दुकान में रखे चालू–गैर चालू मशीनें, प्रेस आदि जोड़ कर करीब 15 किलोवाट चोरी का आकंलन कर दिया गया। गुडवर्क था तो इसकी वाहवाही भी लूटी गई लेकिन इसका शमनशुल्क नहीं जमा हुआ। अभी भी इस मामले में मोलभाव चल रहा है। इसी तरह से जिस स्थान पर यह चोरी पकड़ी गई थी, उसके आसपास दर्जनों प्रतिष्ठानों व कारखानों में डायरेक्ट बिजली जल रही है मगर वहां से उपकेंद्र के संविदा कर्मियों को हर महीने पैसा मिल रहा है। इस कारण से वहां कोई जाता ही नहीं। जहां से पैसा नहीं मिलता, वहां आकस्मिक जांच हो जाती है।

 

दरअसल यह महज उदाहण भर है। लेसा में व्यवस्था को सरल और करने के मकसद से संविदा प्रणाली लागू की गई थी। मीटर रीडिंग से लेकर बकाया वसूली और डिस्कनेक्शन का काम संविदा पर हो रहा है लेकिन संविदा कर्मी ही विभाग के रोग साबित हो रहे हैं। शनिवार को रेजीडेंसी वितरण खंड अंतर्गत छितवापुर में हुई लेसा कर्मियों की पिटाई और हंगामे की वजह भी यही बताई जा रही है। आलम यह है कि उपभोक्ताओं के मीटर खराब करने से लेकर चोरी तक काम यही संविदा कर्मी करा रहे हैं। उपकेंद्र अभियंताओं का संरक्षण होने के कारण जिम्मेदार अभियंता मौके तक जा ही नहीं रहे हैं।

केवल संविदा कर्मियों द्वारा दी जाने वाली जानकारी को सही मान कर उपभोक्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। प्रबंधन और उच्चाधिकारियों के दबाव में जब बकाये पर कनेक्शन काटने या कनेक्शन की जांच की बात आती है तो टकराव हो जाता है। पिछले एक सप्ताह में चार स्थानों पर इसी तरह की झड़प देखने को मिली। शनिवार को रेडीडेंसी वितरण खंड अतंर्गत छितवापुर में भी देखने को मिला। यहां पर भी लोग कनेक्शन काटने पहुंची टीम से भिड़ गए और जमकर हंगामा किया। नाराज महिलाओं ने लेसा टीम को खदेड़ दिया।

 

नए साहब के साथ ही पहुंच जाते हैं कारखास

संविदा कर्मियों का यह खेल लेसा में अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंताओं के संरक्षण में चल रहा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी खंड में अधिशासी अभियंता बदलते हैं तो नए साहब के साथ एक - दो कारखास पहुंच जाते हैं। उसके बाद बिल संशोधन से लेकर पार्ट पेमेंट तक में इनका खास योगदान रहता है। केवल ये कारखास ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में काम करने वाले संविदा कर्मियों में साहब के जानने वाले लोगों की टीम शामिल हो जाती है। यानी साहब की तैनाती के साथ ही वसूली टीम सक्रिय हो जाती है। नए निर्माण, अस्थायी कनेक्शन आदि में तो जमकर खेल होता है।

केवल छोटे उपभोक्ता ही निशान पर

लेसा अभियंताओं की इस कार्यशैली के कारण ही केवल घरेलू उपभोक्ता ही लेसा के निशाने पर रहते हैं। कई कई मंजिला निर्माण बिना कनेक्शन हो जाते है लेकिन अभियंता अनभिज्ञ बने रहते हैं। य़ही कारण है कि तमाम दावों के बावजूद किसी खंड में अपार्टमेंट की जांच नहीं हो पाई। केवल घरेलू कनेक्शन तक सारा बिजली चोरी अभियान सीमित रह जाता है। जबकि अमीनाबाद से लेकर निशातगंज - रिंग रोड तक रोज शाम को कटिया से हजारों यूनिट बिजली खुलेआम चोरी होती है लेकिन मजाल है कि किसी अभियंता को नजर आए।

 

यह बात सही है कि उपभोक्ताओं और लेसा दल के बीच टकराव की कई घटनाएं हुईं। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि लेसा के अभियंता अपने इलाकों में नियमित रूप से जाते नहीं है। संविदा कर्मियों की रिपोर्ट के आधार पर सारी कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए अभियंताओं को अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से जाने के निर्देश दिए जाएंगे।

एपी शुक्ला

अधीक्षण अभियंता (लेसा)

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