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क्या है दलितों की सूची का माजरा...गोपी पारिया की मौत के पीछे की कहानी...पढ़िए

Rising At 8am | 08-Apr-2018 | Posted by - Admin
   
Dalit boy of Shobhapur Meerut Uttar Pradesh Shot Dead In Bharat Band

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

यूपी के मेरठ के शोभापुर गांव में दलितों की “सूची” जारी हुई और एक युवक की हत्‍या कर दी गई।

इस लिस्‍ट के बारे में यह उड़ा था कि यह उन दलित नौजवानों को मारने या सजा देने के लिए तैयार की गई है जिन्होंने भारत बंद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

इसके बाद गांव के ही गुर्जरों ने एक दलित युवक गोपी पारिया को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। दलित इस घटना से अक्रोशित तो हैं ही साथ ही भयभीत भी।

पुरानी रंजिश तो नहीं!

गाँव के कुछ लोग कहते हैं कि ये मामला पुरानी रंजिश का है। दलित के लड़के गोपी पारिया ने तीन साल पहले होली के दिन गुर्जर समुदाय के मनोज और गुलवीर गुर्जर का सिर फोड़ दिया था।

इस मामले में फ़ौजदारी नहीं हुई थी और गाँव की पंचायत ने मामले को संभाल लिया था। गोपी की हत्या के लिए गाँव वालों को वो घटना एक मामूली वजह लगती है।

ज़्यादातर गाँव वाले मानते हैं कि ऐसे झगड़े तो कभी न कभी होते रहे, लेकिन इस घटना से पहले उनमें जातीय हिंसा का रंग कभी नहीं रहा।

बहरहाल, गाँव में दलित मोहल्ले को जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तैनात है।

भारत बंद में शोभापुर के लड़के और गोपी की भूमिका

पुलिस के मुताबिक सोमवार, 2 अप्रैल को जब दलितों के देश व्यापी भारत बंद का आयोजन हुआ था तो एनएच-58 पर शोभापुर गांव के कुछ युवक भी मौजूद थे। प्रदर्शन में गोपी ने उनका नेतृत्व किया था। गोपी के पिता ताराचंद पारिया जो कि बसपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं, के मुताबिक, "भारत बंद के दौरान प्रदर्शन एकदम शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन पुलिस ने जाति-सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लाठीचार्ज किया।"

हिंसा भड़क गई। दलितों का दावा है कि हिंसा भड़काने वाले बाहरी लोग थे। पुलिस के मुताबिक़, "लोग शोभापुर के ही थे।"

गोपी की हत्या के मुख्य अभियुक्त मनोज गुर्जर के बड़े भाई ओमवीर सिंह गुर्जर कुछ दुकान मालिकों का नाम लेते हुए कहते हैं कि चौराहे पर उनकी दुकानें दलितों ने लूटी हैं। दलितों ने महिलाओं से बेअदबी की। इसलिए उन्हें रोकना ज़रूरी था।

भारत बंद की रात नुक़सान का आकलन किया गया। गाँव के गुर्जरों, ब्राह्मणों और बनियों ने कथित तौर गाँव के मंदिर के पास एक मीटिंग की। कुछ चश्मदीदों के बयान लेकर और कुछ जिन लोगों पर शक़ था, उपद्रवियों की एक लिस्ट तैयार की गई।

इस लिस्‍ट से पुलिस का ताल्‍लुक!

मेरठ की एसएसपी मंज़िल सैनी ये स्पष्ट कर चुकी हैं कि ऐसी किसी भी लिस्ट से उत्तरप्रदेश पुलिस का कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन एक और दिलचस्प बात ये है कि पुलिस की एफ़आईआर में जो नाम आ रहे हैं, वो सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही लिस्टों से मेल खाते हैं।

यही वजह है कि इलाक़े के ज़्यादातर दलित यूपी पुलिस पर सवर्णों के इशारे पर काम करने का आरोप लगा रहे हैं।

गोपी पारिया के चचेरे भाई अरुण पारिया रियल एस्टेट कंपनी में काम करते हैं।

उन्होंने कंकरखेड़ा थाने में लड़कों की पिटाई करते पुलिसवालों की एक वीडियो दिखाई और कहा, "योगी सरकार में पुलिस बहुत आक्रामक है। इतने एनकाउंटर हो रहे हैं। ऐसे पिटाई की जा रही है। सिर्फ़ नाम आने पर अगर हमें ले गए तो बहुत मारेंगे। हमारी कोई सुनवाई नहीं होगी। इसलिए बहुत से लड़के डर के मारे फ़रार हैं।"

ऐसे हुई गोपी की हत्‍या

गोपी के परिवार वाले बताते हैं कि 2 तारीख़ के बाद वो भी घर से बाहर ही था। 4 तारीख़ की दोपहर गोपी कपड़े बदलने घर आया था।

रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी और अभियुक्त कपिल के पिता सुखबीर सिंह ने बताया कि गोपी ने उनके बेटे से कहा था कि वो हिंसा के मामले में पुलिस को गवाही न दे। इससे दलितों की परेशानी बढ़ रही है।

गोपी के पिता ताराचंद कहते हैं कि गाँव का ही सुनिल नाम का एक लड़का उसे ये कहते हुए घर से बुलाकर ले गया था कि मनोज गुर्जर ने बात करने के लिए बुलाया है। वही मनोज जिसे तीन साल पहले गोपी ने पीटा था।

इसके बाद क़रीब सवा चार बजे पूरे गाँव में छह फ़ायर सुनाई दिए। गाँव की श्रीराम विहार कालोनी के तिराहे पर, मंदिर परिसर के सामने गोपी को गोलियाँ मारी गईं। गोलियाँ लगने के बाद गोपी घर की तरफ भागा। क़रीब दो सौ मीटर दौड़ने के बाद वो ज़मीन पर गिर गया और अस्पताल पहुंच कर उसकी मौत हो गई।

शोभापुर के दलितों ने दी धर्मपरिवर्तन करने की चेतावनी

दलितों के भारत बंद के दौरान हुए बवाल में चर्चित शोभापुर गांव का माहौल अभी नरम नहीं है। दलितों ने आरोप लगाया कि दलित विरोधी संगठनों के लोग उन हमला करने के लिए गांव में घूम रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्याचार बंद नहीं हुआ तो वह धर्मपरिवर्तन कर लेंगे।

शोभापुर प्रकरण में गांव के दलितों का कहना है कि उन पर सत्ता के दबाव में जबरन अत्याचार किया जा रहा है। वे गांव में शांति व सौहार्द चाहते हैं, लेकिन दलित विरोध संगठनों के लोग गांव में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। दलितों पर हमला करने के लिए बाहर के लोग गांव में देखे जा रहे हैं, जिनके खौफ से गांव के लोग पलायन करने को विवश हो रहे हैं। दलितों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर गांव के दलितों पर अत्याचार बंद नहीं किए गए तो बहुत जल्द गांव के समस्त दलित धर्मपरिवर्तन कर इस्लाम धर्म ग्रहण कर लेंगे।

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