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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी अपर आयुक्त के आदेश के बाद भी स्कूली वाहनों की लिस्ट केवल इसलिए नहीं बना पाए क्योंकि दफ्तर में पिछले दिनों पुलिस छापे के बाद दलाल व बाहरी लोगों को भगा दिया गया था। उसके बाद एआरटीओ साहब को कोई टाइपिंग करने वाला नहीं मिला, लिहाजा पांच दिन बाद भी स्कूल वाहनों की सूची नहीं तैयार हो पाई।

दरअसल अधिकारियों के इस जवाब के बाद ही साफ हो जाता है कि आरटीओ दप्तर में चल क्या रहा है। परिवहन मंत्री स्वंतत्र देव सिंह से लेकर परिवहन आयुक्त पी गुरुप्रसाद भले ही तमाम दावे कर रहे हों लेकिन हकीकत यह है कि आरटीओ दफ्तर पूरी तरह से दलालों के हवाले हैं। क्या लाइसेंस या फिर क्या विभागीय कार्य। पिछले दिनों हुए तबादलों के बाद कुछ कर्मचारी जरूर बदल गए लेकिन किस वाहन की फाइल कहां से निकलेगी, इसकी जानकारी केवल दफ्तर के अंदर सक्रिय दलाल व कर्मचारियों कारखास ही जानते हैं। यही कारण है कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

दरअसल स्कूली वाहनों की जांच के लिए शासन तथा परिवहन आयुक्त एवं प्रमुख सचिव परिवहन तक ने आदेश दिए थे लेकिन राजधानी में ही इनकी जांच न के बराबर हुई। कागजों पर वाहवाही बटोरने के लिए अधिकारियों ने करीब 94 फीसद वाहनों की जांच करने का दम तो भर दिया लेकिन ये वाहन कौन से थे, इसकी जानकारी खुद अधिकारी नहीं दे पाते। यही नहीं, जांच शुरू भी होती है तो एक दो दिन में उसे किसी दूसरे काम के बहाने टाल दिया जाता है। इस बावत अपर परिवहन आयुक्त वीके सिंह ने बताया कि एआरटीओ संजीव गुप्ता द्वारा उन्हें बताया गया है कि पुलिस के छापे के बाद एजेंट भाग गए थे, लिहाजा स्कूली वाहनों की सूची टाइप नहीं हो सकी। इसे जल्द टाइप करा करा लिया जाएगा। सवाल यह है कि इन दौरान कोई हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा।

दस फीसद वाहन भी नहीं आते

परिवहन अधिकारी भले सख्ती करने की दलील दें लेकिन उनका उपहास स्कूली वाहन खुलेआम उड़ा रहे हैं। मई महीने से लेकर जुलाई तक स्कूली वाहनों की जांच के लिए परिवहन दफ्तर में कई कैंप आयोजित किए गए लेकिन कभी भी दस फीसद से ज्यादा वाहन नहीं पहुंचे। यही नहीं, जिन वाहनों की जांच स्कूलों में जाकर हुई थी, उनकी कमियां दूर हुईं अथवा नहीं, यह किसी अधिकारी को नहीं मालूम। ऐसे में निजी स्कूल वाहन से स्कूल जाने वाले बच्चे कितने सुरक्षित हैं, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

"प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा निर्देश के बाद भी लगातार लापरवाही बरती जा रही है। इसकी जानकारी परिवहन आय़ुक्त को भी दी जा चुकी है और अधिकारियों का रवैया नहीं बदला तो कार्रवाई निश्चित रूप से होगी।"

वीके सिंह

अपर परिवहन आयुक्त

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