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तेजी ऐसी कि खोद डाली छह हफ्ते पहले बनी सड़क

| Last Updated : 2018-04-08 09:44:18

 

  • चौक में बिजली की लाइनों को भूमिगत करने में भी खेल
  • मियाद का पता न काम की सीमा, झेल रहे लोग

Corruption During Underground Lining In name of Development in Lucknow


दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

राजधानी में विकास के नाम पर बिजली की लाइनों को भूमिगत करने की आड़ में जमकर पैसे की लूट हो रही है। काम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इंवेस्टर सम्मिट के चलते करीब 45 दिन पहले चौक में बनी रोड को पिछले सप्ताह फिर खोद डाला गया। एक तरफ की रोड खोदने के कई दिन बाद भी अभी काम पूरा नहीं हुआ है। खास बात यह है कि लेसा के अधिकारी सारा काम बिजली विभाग से अनुमति लेकर किया जाना बता रहे हैं जबकि नगर निगम इसके लिए मुख्यालय से अनुमति मिलने की दलील दे रहे हैं। लेकिन कोई विभाग यह नहीं बता रहा है कि नई सड़क खोदने से हुई राजस्व की प्रतिपूर्ति कौन करेगा।

चौक क्षेत्र में बिजली की लाइनों को भूमिगत करने का काम चल रहा है। करीब एक साल पहले शुरू हुआ काम अभी पचास फीसद भी नहीं हुआ है। कोनेश्वर चौराहे से लेकर मेडिकल कालेज क्रासिंग तक एक तरफ की सड़क महीनों खुदी पड़ी। करीब महीने पहले होली के आसपास अचानक ही सड़क को ठीक किया गया लेकिन पिछले हफ्ते फिर एक तरफ की सड़क खोद दी गई। इसके चलते पूरे इलाके में यातायात समस्या व गंदगी फैल गई। खास बात यह है कि ठेकेदार और बिजली विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत का आलम यह है कि अधिकारी खुद ही इस पूरे गोरखधंधे दबाने में जुट हैं। लेसा के निर्माण इकाई के अधीक्षण अभियंता राम प्रकाश लाइनों के भूमिगत करने का काम नगर निगम की सहमति से होने की बात तो कहते हैं लेकिन यह नहीं बता पाते कि काम कितने वक्त में पूरा होना है और व्यय कितना होना है। इसके लिए वह समस्त दस्तावेज मध्यांचल भेजने की बात कहते हैं। खास बात यह है कि चौक में बिजली लाइनों को भूमिगत करने के लिए साठ करोड़ से अधिक रुपये की योजना है। एक साल से इस पर काम भी चल रहा है लेकिन साल भर में मुख्य खुनखुनजी रोड पर भी काम पूरा नहीं हुआ है।

अमीनाबाद में भी हुआ खेल

चौक के पहले अमीनाबाद में भी बिजली लाइनों को भूमिगत करने का काम हुआ। इस पर करीब 27 करोड़ रुपये व्यय हुए। मगर बिजली की लाइनें अभी जस की तस है। प्रताप मार्केट और श्रीराम रोड पर दो बार तारों के शार्ट सर्किट के कारण आग भी लग चुकी है। खास बात यह है कि यहां किस क्षेत्र में बिजली लाइनें हटाई गई, इसका जवाब भी वितरण से लेकर निर्माण इकाई तक के अभियंताओं के पास नहीं है। कार्यदायी एजेंसी को भुगतान को लेकर भी अभियंता अलग अलग दलीलें देते हैं। सिस गोमती के मुख्य अभियंता काम जारी होने की दलील देते हैं तो निर्माण खंड के अधीक्षण अभियंता उनकी तैनाती से पहले ही काम समाप्त हो जाने की बात करते हैं। कमोबेश यही कुछ स्थिति अब चौक में भी दिखने को मिल रही है। अधीक्षण अभियंता राम प्रकाश के मुताबिक इंवेस्टर सम्मिट के मद्देनजर सड़क बनवा दी गई थी। काम के लिए दोबारा अनुमति ली गई होगी।

अमीनाबाद  और चौक में बिजली लाइनों को भूमिगत करने के काम के जानकारी कर ही कुछ बताया जाएगा। अगर लाइनें हटीं नहीं है तो काम क्या हुआ, यह गंभीर बात है। सारे प्रपत्रों की जांच के बाद के इस पर कार्रवाई की जाएगी।

संजय गोयल

प्रबंध निदेशक मध्यांचल

कुछ हफ्ते पहले बनी सड़क को दोबारा खोदने की अनुमति कैसे दी गई। इसकी जांच कराई जाएगी। सड़क को दोबारा ठीक कराने के लिए प्रतिपूर्ति राशि की वसूली संबंधित एजेंसी से वसूली जाएगी। अनुमति किन कारणों से दी गई, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।

संयुक्ता भाटिया

महापौर 

 

 



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