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दि राइजिंग न्यूज़

संजय़ शुक्ल

सभी फोटो- अभय वर्मा, कुलदीप सिंह 

लखनऊ।

 

कुशीनगर में स्कूल वैन हादसा को दस हफ्ते भी नहीं बीते हैं लेकिन परिवहन विभाग के मुस्तैद अधिकारियों वाहनों की जांच का मौका नहीं मिल सका। वास्तविकता में भले ही अधिकारी स्कूल बंद होने की दुहाई देते रहे लेकिन कागजों में करीब 95 फीसद वाहनों की जांच का दावा किया गया है। खास बात यह है कि यह जानकारी सरकार तक को भेजी गई है लेकिन जांच कब हुई, इसे लेकर तमाम बातें पहेली बनी हुई हैं।

दरअसल अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान ही कुशीनगर में हुए स्कूल वैन हादसे के बाद मुख्यमंत्री से लेकर परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने स्कूली वाहनों की शत प्रतिशत जांच के आदेश दिए। दो बार इसके लिए कार्यक्रम भी घोषित हुए, लेकिन हर बार तमाम नुक्ते बताकर जांच को आधा अधूरा छोड़ दिया गया। मई प्रथम सप्ताह में हुए आदेश का पालन केवल इस कारण नहीं किया गया कि 12 मई के बाद स्कूल बंद हो गए। नए सत्र यानी जुलाई में स्कूल खुलने के साथ ही अभियान शुरू करने का दम भरा गया। मगर सोमवार को इस बावत पता किया गया तो पता चला की राजधानी सहित पूरे प्रदेश में स्कूल वाहनों की जांच हो चुकी है।

करीब 95 फीसद वाहन जांच लिए गए। इसमें राजधानी सहित आठ संभागों में तो शत प्रतिशत जांच का दावा भी कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि जांच की अवधि को जुलाई 2017 से जुलाई 2018 के बीच का बताया गया। अब यह जांच कैसे हुई, इसका जवाब देने को कोई अधिकारी तैयार नहीं है।

कुशीनगर में डेढ़ सौ फीसद जांच

परिवहन विभाग के अधिकारियों की मुस्तैदी का आलम यह है कि कुशीनगर जिले में स्कूली वाहनों की डेढ़ सौ फीसद जांच कर दी गई। जी हां, वहां पर करीब 525 स्कूली वाहन हैं लेकिन जांच 725 की हो गई। चौकिंए, दरअसल अधिकारियों ने छुट्टियों के दौरान करीब दो सौ वाहनों की दोबारा जांच कर डाली। वैसे साल में जो जांच हुई, इसका प्रमाण तो अप्रैल में हुए हादसे में ही मिल गया था।

प्रदेश में 46 हजार स्कूल वाहन

अपर परिवहन आयुक्त बीके सिंह के मुताबिक प्रदेश भर में करीब 46 हजार स्कूल वाहन हैं। उनमें 41 हजार से अधिक वाहनों की जांच प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा की गई है। जांच के दौरान महज 79 वाहन गड़बड़ मिले जिनकी फिटनेस रद करने के आदेश दिए गए।   

खतरे में मासूम

परिवहन विभाग के लापरवाह – भ्रष्ट अधिकारियों के रवैये के चलते मुसीबत में नन्हें मासूम बच्चे हैं। अवैध रूप से संचालित स्कूल वाहन बच्चों स्कूल पहुंचा रहे हैं। ये वे वाहन हैं जिन्हे स्कूल अपना मानने से ही इंकार कर देते हैं लेकिन परिवहन विभाग के भ्रष्ट अधिकारी इन्हे आसानी से परमिट दे देते हैं। परिवहन विभाग की उदासीनता के कारण इन वाहनों के हादसाग्रस्त होने की आशंका भी लगातार बनी रहती है।

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