Irrfan Khan Writes an Emotional Letter About His Health

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।


सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन, लीबिया और यूएई ने कतर के साथ अपने रिश्‍ते समाप्‍त कर दिए हैं। यानि कि अब ये देश कतर से कोई राजनयिक संबंध नहीं रखेंगे। इन चारों देशों ने कतर के साथ न केवल अपने कूटनीतिक और राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं, बल्कि हवाई व समुद्री संपर्क तोड़ने का भी ऐलान किया है। बहरीन ने कतर में रह रहे अपने सभी नागरिकों को वहां से लौट आने के लिए 14 दिन का समय दिया है।


स्थितियां ऐसी हो गईं हैं तो या जानना बेहद जरूरी है कि आखिर कतर ने ऐसी कौन सी गलती कर दी जो बाकी देशों को रास नहीं आई। इन सभी देशों ने आरोप लगाया है कि वह चरमपंथ फैलाने वाले इस्लामिक संगठनों की मदद कर रहा है, हालांकि ऐसे आरोपों से कतर ने इनकार किया है।


सऊदी अरब ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सऊदी को आतंकवाद और कट्टरपंथ से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। 


कल और आज


कतर की कल और आज की स्थिति में फर्क आया है। एक दौर ऐसा था जब यह देश खाड़ी देशों में सबसे गरीब था, लेकिन आज ये इलाके के सबसे अमीर देशों में शामिल है। यहां की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत उसके गैस भंडार हैं।


अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित की कोशिशों में दखल दिया है, और 2022 के फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के आयोजन के लिए दावेदारी पेश की है।


भारत पर असर


लेकिन इस पाबंदी के क्या मायने हैं और इसका असर भारत पर क्या होगा?


लंबे समय से भारत और कतर के रिश्ते मधुर रहे हैं। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जून में दोहा की यात्रा की थी। उन्हें यहां शासक (जिन्हें अमीर कहा जाता है) एचएच शेख तमीम बिन हमाद अल थानी ने आमंत्रित किया था।


हमाद अल थानी मार्च, 2015 में भारत आ चुके हैं। उनके पिता भी कई बार भारत आ चुके हैं। कतर में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं। अब तो हजारों लोग ऐसे भी हैं, जिनका जन्म कतर में ही हुआ है।


यहां मौजूदा समय में करीब साढ़े छह लाख भारतीय रह रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के जीवन पर इस पाबंदी का असर तो पड़ेगा। यहां रहने वाले लोग पहले की तरह से आसानी से अब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात नहीं आ-जा पाएंगे।


हालांकि भारत से सीधे दोहा जाने वाली फ्लाइट पर्शियन गल्फ़ रूट से बिना प्रभावित हुए आ-जा सकेगी। जहां तक आर्थिक संबंधों की बात है, दोनों देशों के बीच आपसी कारोबार 15.67 अरब डॉलर का है। भारतीय कंपनियां क़तर के अहम रोड प्रोजेक्ट, रेल प्रोजेक्ट और मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं।


लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क़तर पर इस पाबंदी पर भारत किधर है।


ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के सऊदी अरब से बेहतर रिश्ते रहे हैं। सऊदी अरब दुनिया भर में कच्चे तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है। अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात भी कच्चे तेल के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल हैं।


उधर, दूसरी ओर कतर लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस का सबसे बड़ा निर्यातक है। ऐसी स्थिति में ज़ाहिर है कि भारत को मौजूदा संघर्ष तुरंत किसी का पक्ष लेने से बचना होगा।


जब तक क़तर में रह रहे भारतीयों के जीवन पर बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़े तब तक भारत के लिए संतुलित रवैया रखना ही बेहतर होगा।


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