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कड़ाके की ठंड में कब मिलेंगे नौनिहालों को स्वेटर

| Last Updated : 2018-01-06 11:00:53

 

  • शिक्षक संघ ने स्वेटरों की खरीद से हाथ खड़े किए

  • बच्चों को समय से स्वेटर मिल पाना हुआ टेढ़ी खीर


Conditions of Government Schools Students in Winters


दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदेश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इस कड़ाके की ठंड में समय से स्वेटर मिलना अब और भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। टेंडर रद कर दिए जाने के बाद भले ही सरकार ने स्वेटर खरीद के लिए जिला स्तर पर खरीद का आदेश दे दिया हो लेकिन अब शिक्षक संघ ने स्वेटरों की खरीद से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बच्चों को समय से स्वेटर मिल पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि कड़ाके की ठंड में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को स्वेटर कब मिल पाएंगे, यह भी कोई बता नहीं पा रहा है।

दरअसल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1.54 करोड़ बच्चों को सर्दियों में स्वेटर दिए जाने की व्यवस्था सरकार को करनी थी। इसके लिए गत सितंबर 2017 में टेंडर भी जारी किया गया था। गत 22 दिसंबर को टेंडर खुला लेकिन फिर उस पर विवाद उठने लगे थे। उधर सर्दियों का कहर गहराने लगा। बच्चों को स्वेटर मिलने में हो रही देरी को देखते हुए स्वेटर खरीदने के लिए जिलास्तर पर कमेटी बना कर खरीद की अनुमति दे दी गई। इसके आदेश भी जारी हो गए। सरकार ने स्वेटर की कीमत 200 रुपये तथा मैरुन रंग भी तय कर दिया।

सरकार के इस फैसले के बाद लगा था कि बच्चों को थोड़ा विलंब से ही मगर ठंड में स्वेटर मिल जाएंगे लेकिन अब शिक्षक संघ ने स्वेटर की खरीद से हाथ खड़े कर दिए हैं। दरअसल स्वेटर की इस तरह से खरीद को लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों का कहना  है कि खरीद के बाद अनावश्यक विवाद होगा और उससे खरीद समिति में शामिल लोग बच नहीं पाएंगे। इन्हीं वजहों से शिक्षक इसमें शामिल नहीं होना चाह रहे है। वैसे भी यह सरकार का प्रकरण है और सरकार ही स्वेटरों की खरीद कराएं।

 

ठंड का कोप झेलेंगे बच्चे

सरकारी स्कूलों बच्चों के स्वेटर खरीद में रहे झोल को देखते हुए अब इस कड़ाके की ठंड में बच्चों को समय से स्वेटर कब मिलेगा, यह कहा नहीं जा सकता है। प्रदेश में पारा लगातार गिर रहा है और शीत लहर का सितम भी बढ़ता जा रहा है। मगर बच्चों के पास स्वेटर तक नहीं है। राजधानी में ही कई स्कूलों में बच्चों को अभी जूते तक नहीं मिले है। ऐसे में कड़ाके की ठंड में बच्चे बिना स्वेटर स्कूल कैसे जाएंगे और इन स्थितियों मे कैसे पढ़ेंगे, यह भी अपने आप में सवाल है।

तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम सुहाना है  . .

प्रदेश सरकार अपनी नीतियों को लेकर विपक्षियों के निशाने पर है। ठंड में स्कूली बच्चों को स्वेटर न मिलने पर सोशल मीडिया पर तंज कसने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अब बरेली में हुई नेमचंद्र की मौत पर निशाना साधते हुए तंज किया है .. फाइलों में तुम्हारे गांव का मौसम सुहाना है. . । उल्लेखनीय है कि स्कूली बच्चों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री के तंज पर बीते दिन उपमुख्यमंत्री केपी मौर्या ने पलटवार करते हुआ कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बच्चों को स्वेटर भेज दिए गए हैं। बाकी बच्चों को भी जल्द मिल जाएंगे। मगर ये सारी बातें सियासी है और कड़ाके की ठंड में स्कूल जा रहे बच्चे हकीकत। देखना यह है कि पहले बच्चों को स्वेटर मिलते हैं या फिर शीत लहर थमती है।

 

 



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