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कड़कड़ाती ठंड और बिना स्वेटर नंगे पैर पढ़ाई

| Last Updated : 2017-12-30 09:56:20

 

  • टेंडर के खेल में ठंड में कंपकंपाने को मजबूर सरकारी स्कूलों के बच्चे
  • सोशल मीडिया पर हो रही है सरकरी स्कूलों में स्वेटर की खरीद पर जंग

Conditions of Government Schools in Lucknow City


दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

राजधानी के भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड स्थित प्राथमिक विद्यालय छावनी मड़ियांव में शुक्रवार को छठी जमात में पढ़ने वाले नीरज बिना स्वेटर और जूते के स्कूल पहुंचे थे। नीरज से पूछा गया तो बताया कि स्वेटर अभी तक मिला ही नहीं। घर पर है नहीं, लेकिन स्कूल आना जरूरी है। जूते – स्वेटर न मिलने पर मैडम से पूछों तो मार और डांट। यह एक नहीं दर्जनों बच्चों की दास्तां है। जी हां, एक तरफ प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधा के कसीदे पढ़ रही है लेकिन प्राथमिक स्कूलों में बच्चे बिना स्वेटर की ठंड में स्कूल जाने को मजबूर है। केवल इतना ही नहीं, बच्चों को सख्त हिदायत भी है कि खबरदार जो बाहर किसी को जूते –स्वेटर न मिलने की बात कहीं।

 

यह बानगी भर है। छावनी के प्राथमिक स्कूल में बच्चों की क्लास में भी  ईंटो का ढेर लगा है। क्लास में  ईंटो के ढेर के बारे में कोई जानता नहीं है लेकिन बच्चे इतना भर बता पाते हैं कि पीछे चट्टा मैडम ने लगवाया है। यह अक्सर गिर भी जाता है और उससे बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं लेकिन फिर भी इन्हें क्लास के बाहर नहीं किया गया है। दरअसल प्राथमिक स्कूलों में यही हाल है। अधिकारियों के मानें तो यह हाल पूरे प्रदेश में ही है। कारण है कि बच्चे को इस साल जूते मिले हैं न ही ठंड से बचने के लिए स्वेटर। अब ठंड अपना पूरा तेवर दिखा रही है लेकिन सरकार अभी स्वेटरों की खरीद का टेंडर ही फाइनल नहीं कर सकी है। लिहाजा खरीद हुई न स्वेटर बंटे। बच्चे भी बिना स्वेटर स्कूल जाने को मजबूर है। बच्चे बताते हैं कि पिछले जूते मिले थे लेकिन इस बार अभी तक नहीं मिले हैं। क्यों नहीं मिले, इसके लिए कोई बोलने तक को तैयार नहीं है।

 

मगर सियासत गर्म है

बच्चे कड़ाके की ठंड में बिना स्वेटर जूते स्कूल जाने को मजबूर हैं मगर उनके स्वेटर और जूतों पर सियासत जरूर गर्म है। दरअसल ठंड के बावजूद बच्चों को स्वेटर न मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जरूर प्रदेश सरकार पर ठंड में बच्चों को स्वेटर न दिए जाने पर तंज किया था। सरकार ने स्वेटर तो उपलब्ध न कराएं बल्कि प्रदेश की शिक्षा मंत्री ने उसका जवाब जरूर दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को टेंडर एक्सटेंशन की परिभाषा जरूर समझा दीं। सवाल यह है कि ठंड कितने वक्त तक रहेगी और गर्मी में बच्चे स्वेटर का क्या करेंगे। ऐसे में सरकार की मंशा पर सवाल उठना भी लाजिमी है। अब इस समय ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और बच्चे नंगे पैर बिना स्वेटर के पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में यह बच्चे कितने दिन तक स्वस्थ रह कर पढ़ाई कर पाएंगे, यह लाख टके का सवाल है लेकिन अधिकारी इसे पूरे प्रदेश की समस्या बताकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।

सवाल में टेंडर

दरअसल प्रदेश में सरकार स्कूलों में स्वेटर वितरण का टेंडर शुरू से ही सवालों में रहा हैं। सरकारी स्कूलों के 1.54 करोड़ बच्चों को स्वेटर की आपूर्ति के लिए 308 करोड़ का टेंडर जारी हुआ था। यह टेंडर 22 दिसंबर 2018 तक मांगा गया था और 23 दिसंबर को खुलना था। उसके बाद 25 दिसंबर से स्वेटर का वितरण शुरू होना था। सवाल यह है कि क्या कंपनी को मालूम था कि टेंडर किसे मिलना है। जो वह टेंडर अवार्ड होने के अगले दो दिन में आपूर्ति शुरू कर देगी। यही नहीं, कंपनी को तीस में आपूर्ति पूरी करनी है। विवाद होने के बाद इस टेंडर को एक्सटेंशन दे दिया गया। फिलहाल इस पर फैसला भी नहीं हुआ है। अगले चार दिन स्कूल भी बंद हो गए हैं। कड़ाके की ठंड बाद भी बच्चों को स्वेटर मिल जाएं तो भी गनीमत होगी।



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