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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

हल्के मोटर यान (एलएमवी) वाहनों के लिए अब अलग से कामर्शियल लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। यानी साढ़े सात हजार किलोग्राम समग्र वजन वाले वाहनों के संचालन के लिए अब अलग से कामर्शियल लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी बल्कि प्राइवेट लाइसेंस पर ही इन्हें चलाया जा सकेगा। इस संबंध में गत वर्ष दिसबंर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर गठित पीठ ने आदेश जारी किए थे। उसके बाद से अब तक इस कड़ी में दिल्ली, लखनऊ सहित कई कोर्ट आदेश जारी कर चुके हैं।

 

दरअसल, पूरा मामला छत्तीसगढ़ के मुकेश देवगन की टाटा 407 के हादसे से जुड़ा है। उनका वाहन प्राइवेट लाइसेंस धारक चालक चला रहा था। इस प्रकरण में ट्रिब्यूनल के फैसले में वाहन चालक के पास लर्निंग लाइसेंस न होने के कारण प्रतिपूर्ति का जो दावा किया था, उसके खिलाफ मुकेश ने सिविल, उच्च तथा फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे प्रकरण की सुनवाई के दौरान इससे दो जुड़े दो मामले आए, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर पीठ का गठन हुआ। इस पीठ के गठन के बाद इसका फैसला लिया गया और साढ़े सात हजार किग्रा भार तक के वाहन चालन के कामर्शियल लाइसेंस को अनिवार्य नहीं माना गया।

आम लोगों को मिलेगी मदद

खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को होगा। जिन्हें व्यावसायिक लाइसेंस हासिल करने के लिए तमाम पापड़ झेलने पड़ते हैं। आटो, टेंपो, टाटा 407, छोटा हाथी, मैजिक आदि वाहनों के संचालन के लिए अब अलग से कामर्शियल लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। यही नहीं, कामर्शिलय एलएमवी लाइसेंस लाइसेंस के लिए प्रमाणपत्र जारी करने के नाम पर चलने वाले धंधे पर भी इससे लगाम लगेगी।

जल्द जारी होगी एडवाइजरी

परिवहन आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पालन पूरे देश में होना है। आदेश की एक रूपता के लिए जल्द ही एडवायजरी जारी की जाएगी। इस एडवायजरी के मुताबिक लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया को तैयार किया जाएगा।

 

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