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चौक चकल्लस और होली

Rising At 8am | 28-Feb-2018 | Posted by - Admin

 

  • यहां होली है सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक

   
Colors of Holi in Lucknow

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

नवाबी शहर लखनऊ और लखनऊ में चौक। मस्ती, चकल्लस और उम्दा खान-पान के लिए मशहूर इस चौक इलाके में होली का त्योहार अब एक विरासत बन गया है। विरासत भी आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का नमूना। मौज-मस्ती, रंग गुलाल के साथ शुरू होने वाले होली जुलूस का नक्खास –अकबरी गेट में दूसरे संप्रदाय के लोगों द्वारा भव्य स्वागत। केवड़ा जल का छिड़काव और फूलों की वर्षा। यही कारण है कि दशकों से निकलने वाला यह जुलूस अब देश –विदेश में आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

 

पूर्व सांसद लालजी टंडन के मुताबिक, चौक में होली का जुलूस एक सदी से ज्यादा पुराना है। लोगों की मानें तो इसकी शुरुआत नवाबों के समय में हुई थीं और बाद में इसका स्वरूप ज्यादा भव्य होता गया। पूरे क्षेत्र के सभी धर्मों के लोग इस जुलूस में जुटते हैं। सभी लोग जमकर होली खेलते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं। तीन दिन तक चलने वाला यह होली समारोह अब एक पहचान बन गया है।

सराफा मार्केट में होली जलने के पहले शुरु होने वाली रंगबाजी से शुरू होकर तीन तक चलने वाले इस होली उत्सव का समापन होली के दूसरे विश्वप्रसिद्ध हास्य कवि सम्मेलन के साथ होती है। यहां होने वाला हास्य कवि सम्मेलन भी करीब पचास साल पुराना है और इसका मंच कई साल साहित्य सम्राट अमृतलाल नागर ने संभाला। (लाइव –लालजी टंडन)

 

चौक सराफा एसोसिशएन के संरक्षक कैलाश चंद्र जैन के मुताबिक चौक में सराफा मार्केट में होने वाली होली की भी अपनी अलग मस्ती है। दरअसल, इसकी शुरुआत होली के पहले बाजार की बंदी से शुरू हुई। होली जलने के पहले बाजार बंद होने पर तमाम कारीगर –दुकानदार अपने घर जाते हैं। उसके पहले लोग होली खेलते थे। फिर धीरे धीरे नए लोग इसमें आते गए और इसे और भव्य स्वरूप प्रदान किया जाता रहा। होली जलने के पहले बाजार में शाम से गुलाबी रंग से होली खेली जाती है और इसमें सभी दुकानदार शामिल रहते हैं।

चौपटियां

छोटी काशी के रूप में जाने जाने वाले चौपटिया क्षेत्र में होली की दशकों पुरानी बारात निकलती है। यह होली बारात चौपटियां से होते हुए कोनेश्वर मंदिर तक आती है और फिर चौक के होली जुलूस में विलय हो जाता है। समिति के महामंत्री ऋद्धि किशोर के मुताबिक चौपटिया में होली का जुलूस करीब सौ साल पहले शुरु हुआ था। उसके बाद से ही इसका आयोजन हर साल हो रहा है। इसमें क्षेत्र के सभी लोग शामिल होते हैं। जगह जगह होली जुलूस का स्वागत होता है। ठंडाई –गुझिया के साथ लोगों का स्वागत किया जाता है।

राजाबाजार

पुराने लखनऊ में ही राजाबाजार में भी होली की बारात निकाली जाती है। यह बारात पूरे राजाबाजार में घूमती हुई सुभाष मार्ग पर आकर समाप्त होती है। क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से होने आय़ोजित होने वाली इस होली बारात में पूरे क्षेत्र के लोग, जन प्रतिनिधि सभी शामिल होते हैं। ढोल-नगाड़े –बाजे व हर्षोल्लास के साथ होली का जुलूस विभिन्न इलाकों से घूमता और फिर सुभाष मार्ग पर आकर समाप्त होता है।

फूलों की होली

राजधानी के सबसे व्यस्ततम बाजार अमीनाबाद के श्रीराम रोड पर होने वाली फूलों की होली भी दो दशक से ज्यादा पुरानी हो चुकी है। दरअसल इस कपड़ा बाजार में इसकी परंपरा वहां के व्यापारियों ने डाली। मकसद होली की मस्ती का था। इसके लिए बाकायदा कई कुंतल फूल की बौछार होती है। फूलों की बारिश में नाच-गाना और मिठाई –गुझिया खिलाकर लोग एक दूसरे होली की बधाई देते हैं। अबीर –गुलाल से एक दूसरे का टीका करते हैं। व्यापार मंडल के रवींद्र रस्तोगी, उत्तम कपूर व प्रभू जालान के मुताबिक व्यापारियों के आपसी सहयोग से होने वाले इस आयोजन में क्षेत्र के विधायक –मंत्री सहित तमाम गणमान्य व्यक्ति शामिल होते हैं।

 

अमीनाबाद में जवाबी मंडप

इन सब आयोजन के बीच ही अमीनाबाद बाजार में लगने वाले होली के मंडप भी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। भव्य सजावट, जवाबी गायन और मस्ती की पहचान बन चुके ये मंडप बहुत भी भव्य बनाए जाते हैं। इनमें मोहन मार्केट चौराहे पर लगने वाला मंडप करीब ढाई दशक से ज्यादा पुराना है। इसके मुकाबले में अब एक मंडप बुक मार्केट तिराहे पर बनता है। होली जलने के बाद शुरु होता है, दोनों मंडपों में मुकाबला। यह मस्ती –मुकाबला और धूम धड़ाका अगले होली का रंग चलने तक जारी रहता है।

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