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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

डालीगंज चौराहे पर तैनात होमगार्ड ने मोटर साइकिल से जा रहे दो युवकों को जांच के लिए रोका। चालक ने हेलमेट नहीं लगा रखा था। काफी देर तक बात होती रही। किसी तरह होमगार्ड माना तो उसने सौ रुपये देने चाहे। इस पर होमगार्ड भड़क गया। दलील दी गई कि पीछे बैठे युवक ने भी तो हेलमेट नहीं लगा रखा था। नियम से तो दोनों को हेलमेट लगाना चाहिए अन्यथा चालान तो होगा ही। खैर काफी मान मनौव्वल के बाद मामला तीन सौ रुपये में सुलटा। चालान भी नहीं कटा और युवक भी चलते बने। दरअसल यह असर 24 घंटे पहले जारी एसएसपी के निर्देश का है।

 

राजधानी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दोपहिया वाहन चालक तथा पीछे बैठने वाली सवारी के लिए भी हेलमेट अनिवार्य कर दिया है। खास बात यह है कि मोटर यान नियमावली में यह व्यवस्था पहले से ही है मगर पुलिस अथवा परिवहन विभाग अभी चालकों को ही हेलमेट लगाने के लिए बाध्य नहीं कर सका है। लिहाजा यह आदेश मजाक सरीखा नजर आ रहा है। इसका असर इतना जरूर देखने को मिला जांच में बिना हेलमेट पकड़े जाने पर सौ रुपये में पुलिस जिन्हें छोड़ दिया करती थी, अब उनसे तीन सौ रुपये वसूले जा रहे हैं।

दरअसल मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने यह आदेश जारी किया। इसे सोशल मीडिया पर भी प्रचारित कराया। बुधवार को राजधानी में ही हेलमेट सीट बेल्ट का अभियान चला लेकिन कहीं पीछे बैठने वाले का चालान नहीं किया गया। परिवहन विभाग के अधिकारी दलील देते रहे हैं कि कम से कम चालक इतने जागरूक हो जाएं कि वाहन चलाते वक्त हेलमेट लगाएं। उसके बाद पीछे बैठने वालों को भी हेलमेट के प्रति जागरुक किया जाएं। लिहाजा परिवहन विभाग ने अधिसंख्य चालान दोपहिया वाहन चालक के हेलमेट न लगाने के ही किए। इसी तरह से मुस्तैद ट्रैफिक पुलिस को इस नियम की आड़ में कमाई का नया जरिया मिल गया।

 

पुलिस नहीं लगाती हेलमेट

पुलिस कप्तान स्कूटर मोटरसाइकिल पर आगे पीछे बैठने वाली दोनों सवारियों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने का दम भरते हैं जबकि खुद उनके मातहत ही हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। हर चौराहे पर फर्राटा भरते यह पुलिस कर्मी अभियान और जांच की संजीदगी खुद ही बयां कर देते हैं।

अपनी ढपली अपना राग

सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय रोड सेफ्टी काउंसिल के निर्देश के बाद  सड़क हादसों में होने वाली जनहानि को रोकने के लिए हेलमेट –सीट बेल्ट जांच का अभियान चल जरूर रहा है लेकिन अपनी ढपली अपना राग वाले अंदाज में। पुलिस  और ट्रैफिक पुलिस की जांच अलग चल रही है और परिवहन विभाग की जांच अलग। नतीजा यह है कि केवल हेलमेट सीट बेल्ट ही नहीं बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था तक अराजक हो चुकी है।

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