Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेटीगेशन यानी सीबीआइ एक बार फिर हरकत में दिख रही है। सरकार ने बहुजन समाज पार्टी के कार्यकाल में बेची गई चीनी मिलों की जांच सीबीआइ को दी है। खास बात यह है कि यह प्रकरण उच्च न्यायालय में लंबित चल रहा है और ऐसे में अचानक ही सरकार के इस फैसले को लेकर तमाम सवाल भी खड़े होने लगे हैं।

खास बात यह है कि सत्ता हासिल करने और विरोधियों को पस्त करने के लिए सीबीआइ के इस्तेमाल के आरोप हमेशा से लगते रहे हैं और अब सीबीआइ के अचानक सक्रिय किए जाने की पीछे भी कुछ इसी तरह की मंशा का कयास लगाया जा रहा है।

दरअसल, पिछले दिनों हुए फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन की जीत की टीस भाजपा को आज भी सता रही है। मई के अंतिम महीने में कैराना और नूरपुर में विधानसभा उपचुनाव होने हैं। इसके लिए समाजवादी पार्टी और बसपा का गठबंधन है। यही नहीं कयास यह भी लग रहे हैं की विपक्ष संयुक्त प्रत्याशी लड़ा सकता है। राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी के तौर पर तब्बसुम हसन का नाम भी चर्चा में है। चुनाव लड़ने के लिए वह राष्ट्रीय लोक दल से जुड़ने जा रही है। इसी तरह से नूरपुर से भी समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी लगभग तय कर दिया है।

समाजवादी पार्टी को बहुजन समाज पार्टी भी सहयोग कर रही है और ऐसे में जातीय समीकरण के आधार पर भाजपा के लिए दोनों सीटें जीतना एक कठिन चुनौती लग रहा है। वैसे भी कैराना की सीट भाजपा के लिए परंपरागत नहीं है। इसके अलावा विपक्षी सरकार की उपलब्धियों को लेकर हमेशा सवाल खड़ी करती रही है। किसानों की समस्या भी कहीं छिपी नहीं है और उसका पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा है। विपक्ष के एकजुट होने के कारण भाजपा दिक्कत में दिख रही है और लोकसभा उपचुनाव के बाद अगर पार्टी विधानसभा में भी मात खाती है तो इसका लोकसभा चुनाव पर असर दिखना स्वाभाविक है।

नेता ही नहीं नौकरशाह भी बेचैन

विपक्षियों के मुताबिक सरकार को हार का डर सता रहा है और यही कारण है कि पूर्व  मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो पर निशाना बनाने की कवायद शुरू कर दी है। दरअसल, बसपा शासन में 21 चीनी मिलों को औने-पौने दाम में बेच दिया गया था। करीब सात साल पुराने मामले में अचानक सरकार की सक्रियता कुछ अलग ही बयां कर रही है। सीबीआइ की जांच होती है तो इसमें बसपा के कई कद्दावर नेताओं के साथ तत्कालीन कई नौकरशाह पर शिकंजा कसना तय है। इनमें कई तो सपा सरकार में ही पाला बदल कर महत्वपूर्ण पद पर पहुंच गए थे। कई तो इस समय भी सरकार के नजदीक दिखाई दे रहे हैं।

 

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