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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

बड़ी प्रचलित कहावत है . . भूखे भजन न होए गोपाला। मगर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा सेल के कर्मियों से कुछ इसी तरह से काम करा रहा है। यह अलग बात है कि प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है और सड़क सुरक्षा सेल में संविदा पर तैनात कर्मी अपने महीनों से बकाया वेतन के लिए कहीं ज्यादा मशक्कत कर रहे हैं। ऐसा तब है जब कि परिवहन आयुक्त कार्यालय से इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा चुका है लेकिन इस पर फैसला लंबित है। नतीजतन बस अपना वेतन मिलने का इंतजार कर रहे है। ऐसा तब है जबकि तीन महीने बाद इन कर्मियों के कांट्रैक्ट का रिनीवल होना है। 

देश में सबसे अधिक सड़क हादसों वाले प्रदेश में सड़क सुरक्षा सेल की हालत ही सरकार की हादसों के प्रति संजीदगी को बयां कर देती है। दरअसल परिवहन आयुक्त कार्यालय में ही सड़क सुरक्षा अपर आयुक्त बैठते हैं और वहीं सड़क सुरक्षा सेल भी काम कर रही है। इस सेल का काम सड़क हादसों की जानकारी एकत्र करना तथा उससे संबंधित तथ्यों का आंकलन –मूल्यांकन करना होता है। मगर सेल के ही कर्मचारियों को पिछले आठ महीने से वेतन नहीं मिला है। हर महीने जल्द भुगतान हो जाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ। होली से शुरु हुई वेतन की मांग दीपावली बीतने के बाद भी पूरी नहीं हुई।

परिवहन आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक इन कर्मचारियों का भुगतान शासन स्तर से ही लंबित है। शासन को इस संबंध मे पत्र जा भी चुके हैं लेकिन फिलहाल धनावंटन नहीं किया गया है। पैसा आवंटित होते ही कर्मियों को भुगतान करा दिया जाएगा।

गत वर्ष भी मिला था सात साल वेतन

 

शासन में संविदा कर्मियों और वाहनों के भुगतान को रोकने की प्रवृत्ति कोई नई नहीं है। संविदा कर्मी ही बताते है कि पिछले साल सात महीने बाद वेतन मिला था। इसी तरह से यात्रीकर अधिकारियों के लिए ठेके पर लिए गए वाहनों का भुगतान भी रोक दिया गया था जिससे छह महीने से ज्यादा समय तक यात्रीकर अधिकारी पैदल हो गए थे। राजस्व में गिरावट सामने आई तो आनन फानन यात्रीकर अधिकारियों के वाहनों का बकाया भुगतान कराया गया।

 

 

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