Box Office Collection of Dhadak and Student of The Year

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

मंगलवार दोपहर लालबत्ती चौराहे पर वाहनों की जांच कर रहे ट्रैफिक पुलिस अधिकारी एक दोपहिया वाहन चालक का लाइसेंस देखकर हतप्रभ रह गए। दरअसल पुलिस के मांगने पर युवक ने ब्लैंक स्मार्ट कार्ड पुलिस को भी चौंका दिया। इस ब्लैंक कार्ड पर नाम था न पता। पुलिस भी एक बार को इस लाइसेंस को देखकर अचरज में पड़ गई लेकिन युवक ने इस ब्लैंक को कार्ड ही अपना लाइसेंस बता दिया। हालांकि बाद में वाहन चालक का चालान कर दिया गया। होनहार मुस्तैद पुलिस की गंभीरता को इससे भी समझा जा सकता है कि उसने यह जानने तक की कोशिश नहीं की कि आखिर ब्लैंक स्मार्ट कार्ड चालक तक पहुंचा कैसे।

 

दरअसल पूरा मामला संभागीय परिवहन दफ्तर में चल रही दलालों की कारगुजारी का नमूना भर हैं। इससे परिवहन दफ्तर में चल रहे खेल का भी खुलासा हो गया। उधर यह मामला सामने आने के बाद एसपी ट्रैफिक रविशंकर निम ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी आरटीओ को दी जा रही है। इसकी वजह भी साफ है। दरअसल स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस आरटीओ द्वारा ही जारी किए जाते हैं। ब्लैंक स्मार्ट कार्ड भी परिवहन विभाग को ही मिलते है। इस कारण से बाहर कहीं उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अगर ब्लैंक कार्ड सामने आ रहे हैं, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है।

सक्रिय हुआ परिवहन विभाग

 

ब्लैंक स्मार्ट कार्ड मिलने की जानकारी के बाद परिवहन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। संभागीय परिवहन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि यह बेहद गंभीर प्रकरण है। कारण है कि ब्लैंक स्मार्ट कार्ड मुख्यालय से संभागीय दफ्तरों को अलाट किए जाते है। इन ब्लैंक स्मार्ट कार्ड में एक सीरियल नंबर होता है और उसी के आधार पर यह पता चल जाएगा कि स्मार्ट कार्ड किस दफ्तर से निकला है। इसके लिए सीधे तौर पर स्मार्ट कार्ड जारी करने वाली एजेंसी ही जिम्मेदार है। इसके अलावा संबंधित लाइसेंस प्राधिकारी की जिम्मेदारी भी फिक्स की जाएगी।

रिकार्ड से लेकर टेस्ट ग्राउंड तक एजेंट

 

अधिकारियों के दावे चाहे जो हों, लेकिन हकीकत में आरटीओ दफ्तर में व्यवस्था दलालों के सहारे चल रही है। इसकी एक बड़ी वजह कर्मचारियों की कमी है। वर्तमान में आरटीओ दफ्तर में करीब डेढ़ दर्जन कर्मचारी ही है। नतीजा यह है कि प्रतिदिन एक न एक पटल खाली रहता है। इसी तरह से दफ्तर में रिकार्ड रूम तक दलालों से भरा रहता है। सब कुछ अधिकारियों की जानकारी में हो रहा है। मगर कर्मचारियों की कमी के कारण लगाम नहीं लग पा रही है। मुख्यालय तक को इसकी जानकारी है लेकिन व्यवस्था नहीं हुई। आलम यह है कि कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन तक नहीं मिला है, कारण है कि तबादले के बाद आरटीओ दफ्तर में कोई लेखाकार ही नहीं है।

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