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सड़क पर सख्ती, गली से संचालन

Rising At 8am | 04-Jan-2018 | Posted by - Admin

 

  • डग्गामार संचालन भी हुआ सुनियोजित
  • वसूली के दम पर हो रहा है धड़ल्ले से संचालन
   
Case of Transportation in Lucknow City

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर संभागीय परिवहन अधिकारी तक पालीटेक्निक चौराहे पर अवैध स्टैंड समाप्त करने को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन उसके उलट उनके ही अधीनस्थ इस पूरे संचालन पर परदा डालकर उन्हें दूसरे स्थान से संचालित करा अपनी जेब भर रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर परिवहन मंत्री तक अवैध संचालन रोकने के आदेश दे रहे हैं लेकिन विभागीय मिलीभगत के कारण यह रुकने के बजाए कहीं ज्यादा सुनियोजित तरीके से चल रहा है।

अब जरा मुंशीपुलिया चौराहे के नजदीक कलेवा रेस्त्रां के बगल की गली में देखें। यहां पर सुबह शाम आप सवारी भरती ट्रैवलर गाड़ी से लेकर जीपें देख सकते हैं। दरअसल यह वे डग्गामार वाहन जो पहले पालीटेक्निक चौराहे पर पुल के किनारे लगते थे। वहां सख्ती हो गई तो ये खिसक कर गली में पहुंच गए। यानी अब किसी की नजर भी नहीं पड़ती। जिम्मेदार पालीटेक्निक चौराहे पर लगने वाले ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की इसकी पूरी सूचना है लेकिन अब उन्हें कुछ करना भी नहीं पड़ रहा जबकि वाहनों से से होने वाली कमाई बदस्तूर जारी है।

इसी तरह से दूसरा अवैध बस अड्डा तैयार हो गया है रिफा ए आम क्लब। सिटी स्टेशन के ठीक सामने स्थित यह पुराने क्लब के ग्राउंड से ही दिन भर फैजाबाद, गोंडा, बहराइच आदि मार्गों के लिए डग्गामार वाहन संचालित हो रहे हैं। अपने निर्धारित समय से यह वाहन सवारियां लेकर निकलते हैं। उसके बाद क्लार्क तिराहा मोड़ पर एक संक्षिप्त स्टापेज के बाद गंतव्य को निकल जाते हैं। सवारियां भी क्लार्क तिराहे के बजाए अब सीधे रिफा ए आम क्लब ही पहुंच जाती है। इसी तरह से राजधानी आते वक्त यह क्लार्क तिराहे पर सवारी उतार कर सीधे रिफा ए आम क्लब में आकर खड़े हो जाते हैं। यह पूरा आपरेशन भी पुलिस औऱ परिवहन विभाग के सहयोग से चल रहा है।

खास बात यह है कि रिफा ए आम क्लब से महज डेढ़ किमी दूरी पर ही कैसरबाग बस अड्डा व अवध डिपो है। परिवहन आयुक्त का दफ्तर भी दो किमी के दायरे में है लेकिन मुस्तैद रोडवेज के अधिकारी बजाए वहां से संचालन बंद कराने के कानपुर रोड, शहीद पथ पर ही जांच बेहतर समझते हैं। कमोबेश परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी भी इन पर रोक के बजाए इनसे कमाई में अधिक रुचि लेते हैं। लिहाजा पकड़ धकड़ केवल आलाधिकारियों या शासन के आदेश पर ही होती है। अन्यथा इन वाहनों को देखा तक नहीं जाता है।

परिवहन विभाग से लेकर पुलिस तक मिलीभगत

अवैध वाहनों के संचालन में परिवहन विभाग - रोडवेज से लेकर पुलिस तक की सांठगांठ का प्रत्यक्ष नमूना है। कारण है कि ये बसें हर वक्त आती जाती है लेकिन पुलिस कभी इन वाहनों को पकड़ती नहीं है। इनका चालान होता भी है तो केवल उन धाराओं में जिन पर मामूली शमन होता है। वर्ना सुविधा शुल्क के जरिए ही इनके संचालन को नजर अंदाज कर दिया जाता है। इस तरह से परिवहन विभाग और रोडवेज के दस्ते भी केवल उन्हीं वाहनों पर कार्रवाई करने निकलते हैं, जिनकी बावत मुख्यालय या शासन से आदेश होते हैं। वर्ना वह व्यवस्था में ही खामियों को गिनाकर इनके संचालन को नजर अंदाज किया करते हैं।

 

 

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