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स्थानांतरण के जरिए परिवहन विभाग की ओवरहालिंग

Rising At 8am | 18-Aug-2017 | Posted by - Admin

  • सालों से जमे अधिकारियों - बाबुओं का तबादला
  • पचास फीसद कर्मचारी हुए जिला बदर

   
Case of Transfer in the department of Transport

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

परिवहन विभाग के विभिन्न संभागों में सालों से तैनात क्लर्क शुक्रवार को स्थानांतरित हो गए। सभी संभागों में पचास फीसद से अधिक कर्मचारियों को दूसरे जिले भेज दिया गया जबकि लखनऊ में ही करीब दो दर्जन कर्मचारी जिला बदर हो गए। विभागीय स्थानांतरण सूची होने के बाद से ही विभाग में सुबह से कामकाज भी प्रभावित दिखा।

परिवहन आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश भर में परिवहन विभाग के संभागों से करीब सवा सौ कर्मचारियों की स्थानांतरण सूची शुक्रवार को जारी हुई। इसके पहले गुरूवार को करीब एक दर्जन एआरटीओ की तबादला सूची जारी हुई थी। ऐसे में कई जिलों में तो अब काम कैसे होगा, यह समस्या भी खड़ी होती दिख रही है। कारण है कि कर्मचारी व अधिकारी दोनों ही नए पहुंच गए हैं।

 

जो लखनऊ में ही थे, वे फिर वापस लखनऊ

 

परिवहन विभाग की तबादला सूची में कई कर्मचारी तो ऐसे हैं जो पहले गैर जिले में भेजे गए थे, लेकिन जोड़ तोड़ कर लखनऊ में सम्बद्ध हो गए। शुक्रवार को जारी सूची में ऐसे कर्मचारियों का वापस लखनऊ तबादला कर दिया गया। इसी तरह से कई कर्मचारियों -अधिकारियों की तैनाती अवधि भी गलत फीडिंग की बात सामने आ रही है। मसलन राजधानी में तैनात एक संभागीय निरीक्षक लखनऊ व सीतापुर में सालों तैनात रहे। फिर लखनऊ में तैनाती पा गए और उसके बाद पिछले करीब छह साल से यहां जमे हैं लेकिन स्थानांतरण से बच निकले। इसी तरह से कई एआरटीओ ऐसे हैं जो एक दशक से ज्यादा समय से एक ही जोन में तैनात हैं लेकिन उन्हें स्थानांतरित कर फिर जोन में ही नई तैनाती दे दी गई।

एआरटीओ की एक सूची अभी विवादित

 

परिवहन विभाग द्वारा पिछले दिनों जारी 27 एआरटीओ की तबादला सूची पर फिलहाल सस्पेंस बरकरार है। दरअसल यह सूची जारी होने के बाद ही तमाम चर्चाएं गर्म हो गई थीं। उसके बाद सूची परिवहन मंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय में तलब हो गई थी। इस सूची में बीस फीसद के करीब अधिकारी ही नए तैनाती स्थल पर ज्वाइन कर पाएं जबकि शेष अभी इंतजार में है। खास बात यह है कि सूची में स्थानांतरित अधिकारियों के लिए आदेश भी फिलहाल जारी नहीं हुए हैं। इस कारण असमंजस बरकरार है।    

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