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साइकिल चलाने का सहूर नहीं, मिल रहा ई रिक्शा का लाइसेंस

     
  
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  • ई रिक्शा लाइसेंस के लिए पांच सौ का प्रमाणपत्र
  • आरटीओ दफ्तर में चल रहा है प्रमाणपत्रों का बाजार

Case of Taking Illegal Money in the name of making Vehicle License

 

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

जलसंस्थान रोड ऐशबाग में स्थित ई रिक्शा बालाजी ट्रेडिंग कंपनी डीलर की दुकान पर एक रिक्शा का सौदा करने तथा लाइसेंस प्रक्रिया पूछने पर वहां तैनात कर्मचारी ने लाइसेंस के लिए परेशान न होने की दलील देते हुए आरटीओ दफ्तर के एक दलाल पी साहू का नंबर (9628031643) दिया। जिसे 11 सौ रुपये, दो फोटो, मार्कशीट व आधार कार्ड देने पर तीन –चार दिन में लाइसेंस घर तक पहुंचाने की गारंटी दी गई। इसकी और जांच की गई तो इस बालाजी ट्रेडिंग कंपनी के पते ही वाईसी इलेक्ट्रिक व्हीकल नामक फर्म भी दर्ज है, जिसके यहां से ट्रेनिंग प्रमाणपत्र दिए जाते हैं। हालांकि शोरूम पर प्रशिक्षण आदि को सिरे से खारिज करते हुए सीधे लाइसेंस ही दिलाने का दावा कर दिया गया। जबकि इसी तरह का दूसरा ट्रेनिंग सेंटर आरटीओ दफ्तर से सौ मीटर फासले पर चल रहा है और उसे ई रिक्शा एसोसिएशन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी चला रहे हैं।

कुटिल व चालाक व्यक्तियों के लिए मिसाल दी जाती है कि लहरें गिन कर भी कमाई का साधन बना लेते हैं। कुछ यही हाल राजधानी के परिवहन दफ्तर का है। राजधानी में संचालित ई रिक्शा की बिक्री से लेकर उनका लाइसेंस तक पूरा सिंडीकेट संभाल रहा है। खास बात यह है कि लाइसेंस देने वाले लोगों में खुद ई रिक्शा एसोसिएशन के उपाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह भी शामिल है और उनके यहां पर 400 रुपये ई रिक्शा चलाने में प्रशिक्षित होने का प्रमाणपत्र दिया जा रहा है। हालांकि जिस पते से प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है, वहां केवल दुकान है जबकि प्रशिक्षण स्थल का अता पता नहीं है।

दरअसल व्यावसायिक वाहनों के लाइसेंस में फर्जीवाड़े की पड़ताल के दौरान ही ई रिक्शा के जारी होने वाले प्रशिक्षण प्रमाणपत्र का मामला भी सामने आ गया। खास बात यह  है कि इसके लिए चार-पांच सौ रुपये के अलावा एड्रेस वेरीफिकेशन, आधार कार्ड या वोटर कार्ड मांगा जाता है। उसके बाद सहजता से कुछ मिनट में कंप्यूटर पर बने फार्मेट पर ही प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। खास बात यह है कि सारा खेल आरटीओ दफ्तर से महज सौ मीटर के दायरे में हो रहा है।  आरटीओ दफ्तर में दलाल के तौर पर व्यावसायिक लाइसेंस काउंटर पर कार्यरत भगवती व मुनव्वर नामक दलाल इसका ठेका ले रहे हैं।

 

प्रमाणपत्र ही गलत

 

लखनऊ ई रिक्शा एसोसिएशन के उपाध्यक्ष द्वारा जारी प्रमाणपत्र संभागीय निरीक्षक व ट्रेड लाइसेंस जारी करने वाले संभागीय निरीक्षक के समक्ष रखा गया तो उन्होंने इसे अवैध करार दे दिया। सवाल यह है कि जिस प्रमाणपत्र को अवैध करार दे रहे हैं, उस पर लाइसेंस कैसे जारी हो रहे हैं। हालांकि इसे लाइसेंसिंग अधिकारी का दायित्व करार दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रमाणपत्र पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही बैट्री रिक्शा डीलरों के प्रशिक्षण स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा।

रेडियम स्ट्रिप में घपला

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क हादसों में होने वाली मौत को लेकर गंभीर दिख रहे हैं जबकि परिवहन विभाग के अधिकारी कमाई का कोई मौका छोड़ने को तैयार नहीं है। खास बात यह है कि ई रिक्शा के जिस प्रमाणपत्र अवैध करार दिया जा रहा है, उसे जारी करने वाले एसोसिएशन उपाध्यक्ष ही फिटनेस ग्राउंड पर वाहनों पर रात में चमकने वाली रेडियम स्ट्रिप लगवा रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी संभागीय निरीक्षक आरपी सिंह को है लेकिन मोटा सुविधा शुल्क मिलने के कारण वह कभी कार्रवाई का साहस नहीं कर सकें। यही नहीं, बुधवार को उनसे चौड़ी रेडियम स्ट्रिप काट कर लगाए जाने के प्रकरण पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डीलर अब 20 एमएम वाली स्ट्रिप मंगा ली है। यानी मोटर वाहन अधिनियम की धज्जियां उनके संरक्षण में उड़ाए जाने की पुष्टि हो गई। 

भ्रष्टाचार दे रहा हादसों को बढ़ावा

 

व्यावसायिक लाइसेंस बनाने के खेल में सक्रिय सिंडीकेट के कारण प्रदेश में हादसों की संख्या में इजाफे के साथ ही मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पिछले साल के मुकाबल इस साल करीब पंद्रह फीसद ज्यादा मौतें यानी 19000 लोग सड़क हादसों का शिकार हुए। जबकि पिछले एक साल में सड़क सुरक्षा के नाम पर तमाम आयोजन हुए, लाखों रुपये फूंके गए। मगर अधिकारी इसे एक दूसरे का जिम्मा बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। यही नहीं, इसका प्रमाण पिछले दिनों मोटर ड्राइविंग स्कूलों के भारी वाहनों की जांच में मिला था, जब जांच के लिए लाए गए तमाम वाहन चलने लायक ही नहीं निकले। मगर इन वाहनों के प्रशिक्षण के नाम पर हर महीने सैकड़ों लोगों को हैवी लाइसेंस प्रदान किए जा रहे हैं। यही नहीं, कुछ कर्मचारी तो मुस्तैद हैं कि ड्राइविंग स्कूलों को जारी होने वाले प्रमाणपत्रों के डेढ़ से दोगुने ज्यादा लाइसेंस कई महीनों में जारी कर दिए गए।

कैसे तय होगी जिम्मेदारी

 

"लाइसेंस जारी करने का काम आऱटीओ दफ्तर में होता है। अगर इसमें गड़ब़ड़ी है तो इसकी जांच आरटीओ कराएंगे। इसमें जोनल की भूमिका नहीं होती है। वहां से को रिपोर्ट आएगी तो विधि सम्मत कार्रवाई जाएगी।"

अनिल मिश्रा

उपर परिवहन आयुक्त

 

"लाइसेंस कोई बाबू जारी ही नहीं कर सकता है। बाबू का काम फाइल प्रस्तुत करना होता है और उसका परीक्षण संभागीय निरीक्षक (आरआई) को करता है। अगर गलत लाइसेंस जारी हो रहा है तो इसके लिए सीधे तौर पर जारी करने वाले अधिकारी दोषी हैं।"

अजय कुमार त्रिपाठी

संभागीय परिवहन अधिकारी

 

"व्यावसायिक लाइसेंस काउंटर पर तैनात कर्मी मोटर ड्राइविंग स्कूल से संबंधित हैं या उसके परिवार में मोटर ड्राइविंग स्कूल हैं तो वहां तैनाती नहीं होनी चाहिए। इसका परीक्षण कराया जाएगा। प्रमाणपत्र से अधिक लाइसेंस कैसे जारी किए गए, इसकी जांच कराई जा रही है और इसमें दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।"

राघवेंद्र सिंह

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी  



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