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चार गुना रायेल्टी से आसमान पर पहुंचे मौरंग-बालू के दाम

Rising At 8am | 17-Mar-2018 | Posted by - Admin
  • बिना रायेल्टी कम हुए, दाम घटना मुश्किल

  • पंद्रह दिन में दाम घटना होगा मुश्किल

   
Case of Price Increasing of Maurang and Sand

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

गोरखपुर और फूलपुर चुनाव में करारी हार झेलने के बाद भवन निर्माण सामग्री बालू और मौरंग के दाम कम करने के मुख्यमंत्री के आदेश कितने कारगर होंगे, यह अपने आप में पहेली बन गया है। इसकी वजह है कि पिछले साल मार्च तक मौरंग की रायेल्टी महज आठ हजार रुपये थी और लदान होती थी, करीब हजार-बारह सौ फीट।

भाजपा सरकार बनने के बाद अवैध खनन पर रोक लगाने के साथ ही मौरंग खनन के पट्टे आवंटित तो किए गए, लेकिन रायेल्टी तीन गुना बढ़ गई। यानी पहले 1200 फीट मौरंग पर आठ हजार रुपये रायेल्टी लगती थी और अब साढ़े चार सौ फीट मौरंग पर 18-25 हजार रुपये रायेल्टी लग रही है।

इसमें पंद्रह हजार रुपये भाड़ा जोड़ लिया जाए तो किसी कीमत पर मौरंग 95-100 रुपये फीट से नीचे नहीं आ सकती है। फुटकर बाजार में इसकी कीमत 110-120 रुपये तक है।

भवन निर्माण सामग्री के थोक कारोबारी एवं सीमेंट व्यापार संघ के श्याम मूर्ति गुप्ता के मुताबिक सरकार ने रायेल्टी इतनी ज्यादा बढ़ा दी कि अब जो लोग सीधे खदान से ही मौरंग ला रहे हैं, उनकी लागत काफी बढ़ जाती है। खुले बाजार में पहुंचते-पहुंचते उसके दाम और बढ़ जाते हैं। भाड़े में इजाफा  हुआ है और सड़क पर भी वसूली बढ़ी है।

 

कारोबारियों के मुताबिक पिछले साल मार्च के मुकाबले इस साल दाम चार गुने हैं। तीन महीने पहले तक तो यह छह गुना तक बढ़ गए थे। फरवरी-मार्च 2017 में फुटकर बाजार में बालू 16-18 रुपये प्रति फुट थी जो आज करीब 40-42 रुपये प्रति फुट है। इसी तरह से पिछले मौरंग फुटकर में 35-38 रुपये फुट थी जो आज 110-120 फुट है।

पहले खनन पर रोक और उसके बाद रायेल्टी में अंधाधुंध इजाफे के कारण भवन निर्माण सामग्री का परिवहन करने वाले तमाम कारोबारी भी इस लाइन से हट गए हैं।

ट्रक ऑपरेटर्स एंड ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक भवन निर्माण सामग्री की ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का दावा तो सरकार जरूर करती है और काफी हद तक रोक भी लगी है, लेकिन जिससे खनन पट्टों पर रायेल्टी बढ़ाई गई, उससे अब ट्रांसपोर्टरों के लिए अपनी लागत निकालना मुश्किल हो गया है। रायेल्टी के साथ ही रास्ते के तमाम खर्च भी बढ़ गए हैं। नतीजा यह है कि जो लोग खनिज तत्वों का परिवहन कर रहे हैं, उनके लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

फिर कैसे लागू होगी व्यवस्था?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुक्रवार को मौरंग-बालू की कीमतों को कम करने के निर्देश अब किस तरह से लागू होंगे, यह भी अपने आप में पहेली बन गया। कारण है कि रायेल्टी में अंधाधुंध इजाफे का विरोध तो काफी समय से हो रहा था। यही नहीं, कई सरकार के नजदीकी लोग इसकी आड़ में ओवरलोडिंग व खनन के जरिए मोटी कमाई कर रहे थे। सारा खेल खुलेआम हो रहा था।

यहां तक कि इसमें कई बार न्यायालय को भी दखल देना पड़ा और कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन अहम सवाल यह है कि पिछले साल भर से खनन पर रोक के नाम पर अपनी तिजोरी भरने वाले नेताओं और अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या फिर मुख्यमंत्री के ये आदेश भी हवा हवाई साबित होंगे।

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