Ayushman Khurrana Wants To Work in Kishore Kumar Biopic

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदेश सरकार सौभाग्य योजना के तहत हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए दम भरते नहीं थक रही है लेकिन राजधानी में ही बिजली अब कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है। बिजली गुल होने के बाद अभियंताओं के बंद मोबाइल फोन लोगों का आक्रोश बढ़ा रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में ही चार उपकेंद्रों पर घेराव – प्रदर्शन तथा तोड़फोड़ तक हुई।

 

खास बात यह है कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पूरे प्रदेश में निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रहे हैं। अभियंताओं को पीक टाइम में उपकेंद्र पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन विभाग के अभियंता ही इसकी हवा निकाल रहे हैं। मंगलवार को चौक और आलमबाग में घंटों बिजली बंद रही। चौक में 33 केवी लाइन में आई खराबी के कारण तड़के करीब साढ़े चार बजे बिजली गुल हुई तो फिर करीब छह घंटे बाद चालू हुई। हालांकि चालू होने के बाद दोपहर में फिर बिजली बंद हो गई जो दो घंटे बाद आई। खास बात यह है कि चौक में पहले छह घंटे केबिल की मरम्मत का दावा किया गया लेकिन दोपहर में बिजली बंद किए जाने का कारम फिर से मरम्मत किए गए केबिल पर दोबारा काम होना बताया जाता रहा ।

इसी तरह से श्रंगार नगर उपकेंद्र से पोषित समर विहार कालोनी, आजाद नगर, चंदन नगर क्षेत्र में भी मंगलवार को पूरे दिन बिजली की आवाजाही से लोग परेशान रहे। उसके बाद में रात में भी बिजली की आवाजाही से लोगों की गुस्सा फूट पड़ा। नाराज लोग उपकेंद्र पहुंचे तो वहां अभियंता भी नदारद मिले। यही नहीं, सहायक अभियंता और अवर अभियंता के फोन भी बंद थे। उपकेंद्र पर मौजूद कर्मी ओवरलोडिंग के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने की दलील देते रहे।

 

फाल्ट बताने वाला भी कोई नहीं

लेसा में अब बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह तक नहीं बताई जाती है। घंटों बिजली गुल रहने पर भी उपभोक्ताओं को कुछ देर में बिजली चालू किए जाने का आश्वासन दिया जाता है। मगर बिजली बिजली बंद होने का सही कारण नहीं बताया जाता है। बिजली विभाग के अभियंताओं के इस रवैये कारण अब उपभोक्ताओं का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि अभियंताओं के मुताबिक बारिश न होने की वजह से मांग में किसी तरह की कमी नहीं आ रही है और ओवरलोडिंग के कारण बिजली की कटौती की जाती है।

मौसम की मेहरबानी का इंतजार

राजधानी में पीक टाइम पर बिजली की डिमांड 1500 मेगावाट के करीब पहुंच रही है। इसकी वजह उमस भरी गर्मी है। बारिश होने पर तापमान में गिरावट होने के साथ ही बिजली की मांग में भी कमी आ जाती है। मगर राजधानी में पिछले 16 दिनों में नाममात्र को पानी गिरा है। पानी गिरने के बाद उसम व चिपचिपी गर्मी बढ़ी है, लिहाजा बिजली की मांग भी कम नहीं हो रही है। अभियंताओं के मुताबिक फिलहाल अच्छी बारिश होने तक बिजली की मांग बनी रहेगी और ऐसे सिस्टम को ओवरलोडिंग से बचाने के लिए कटौती (रोस्टिंग) होती रहेगी।

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