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सफाई में भ्रष्टाचार - सरकार भी लाचार

| Last Updated : 2017-12-28 10:08:28

 

  • दो पायदान नीचे पहुंची राजधानी की रैकिंग

  • कागजी सफाई पर भुगतान का खेल जारी  


Case of Pollution and Dust in Lucknow City


दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश से लेकर गुजरात तक सफाई का संदेश और नसीहत देते नहीं थक रहे हैं लेकिन उनकी नाक के नीचे नगर निगम में भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। आलम यह हर महीने लाखों रुपये की बंदरबांट सफाई के नाम पर हो रही है और नतीजा यह है कि कागजी सफाई की हकीकत इस बार रैकिंग में खुल गई। लखनऊ 13 वें स्थान से खिसक पर 15 वें स्थान पर पहुंच गया है। राजधानी दो पायदान नीचे आ गई जबकि नौ महीने से सरकार सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद करने की कसीदे पढ़ रही थीं।

वर्ष 2018 के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण चार जनवरी से शुरु हो रहा है लेकिन उसके एक हफ्ते पहले ही लखनऊ की रैकिंग में गिरावट ने यहां नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को जगजाहिर कर दिया है। कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था से राजधानी से नवनिर्वाचित मेयर संयुक्त भाटिया भी संतुष्ट नहीं है और यही वजह है कि उन्होंने कूड़ा प्रबंधन की निगरानी के लिए पार्षदों से सहयोग मांगा है। दूसरी नगर निगम के अधिकारी किसी भी बात को मानने को तैयार नहीं है। अधिकारियों के कौशल का कमाल है कि पुराने कारिंदों के जरिए नई कंपनी को कूड़ा निस्तारण का काम तो दे दिया लेकिन कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है।

यहां तक गली मोहल्लों व घरों से लाया जा रहा कूड़ा भी सड़क पर ढेर हो रहा है। खास बात यह है कि कूड़ा निस्तारण का काम देखने वाली एजेंसी के प्रबंधक अभिषेक सिंह इसे ड्रेन क्लीनिंग या स्ट्रीट स्वीपिंग का कूड़ा बताते हैं। जबकि क्षेत्रीय नागरिक इसे कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों से लगाया ढेर बताते हैं।

ठेका शहर का, निस्तारण एक तिहाई

नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण भले ही पूरे शहर में घरों से कूड़ा लेने का दायित्व ईको ग्रीन का बताते हैं कि हकीकत में साठ फीसद घरों से नियमित कूड़े कलेक्शन नहीं हो रहा है। कूड़ा लेने के बाद उसका ढेर भी नुक्कड़ या सड़क पर ढेर किया जा रहा है। हकीकत में कोई जोनल अधिकारी तक इस कूड़े के ढेर को देखने नहीं जाता है। केवल मंत्री या किसी वीआईपी द्वारा सफाई अभियान के वक्त सजे धजे अधिकारी हाथ में झाड़ू उठाए दिखते हैं अन्यथा कमरों में बैठकर ही सफाई की मानीटरिंग की जा रही है। इसके लिए हर अधिकारी को मोटा पैसा भी मिल रहा है।

कंपनी ने पल्ला झाड़ा

डायनेमिक सफाई रैकिंग में दो पायदान नीचे जाने पर कूड़ा निस्तारण में लगी एजेंसी के प्रबंधक अभिषेक सिंह ने सीधे तौर कहा कि वह जानते ही नहीं कि डायनेमिक रैकिंग बला क्या है। खास बात यह है कि अभिषेक सिंह पिछले करीब सात साल से राजधानी मे सफाई व्यवस्था से जुड़े हैं। पहले वह कूड़ा निस्तारण करने वाली एजेंसी ज्योति इन्वायरो में प्रबंधक थे और अब दल बल के साथ ईको ग्रीन में है। इसी तरह से अपर नगर आयुक्त पीके श्रीवास्तव भी सफाई में किसी तरह की रैकिंग कम होने से ही इंकार कर देते हैं। हालांकि वह इसे विस्तार बताने बजाए व्यस्तता की बात जरूर करते हैं।

   

 



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