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अपनी ही गलती को फिर सुधारेगा एलडीए

Rising At 8am | 16-Jun-2017 | Posted by - Admin

  • बसंतकुंज योजना में कब्जेदारों को मकान देने का प्रकरण
  • पूर्व वीसी और प्रमुख सचिव के संरक्षण में आश्रयहीन योजना में हुआ था फर्जीवाड़ा

   
case of illegal acquiring the house of poor people by lda

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।


पहले गलती करो और फिर उसका सुधार करो। यह शायद लखनऊ विकास प्राधिकरण की नियति बन गई है। अब एलडीए यही काम बसंतकुंज योजना में करने जा रहा है। यहां पर एलडीए बोर्ड द्वारा आश्रयहीन योजना के तहत मकानों को कब्जेदारों को दिए जाने का प्रस्ताव बोर्ड ने पास कर दिया था। खास बात यह है कि तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने भी बोर्ड के इस फैसले को भी अपनी सहमति प्रदान कर दी थी। अब एलडीए अपने इस फैसले को बदलने की तैयारी कर रहा है और एलडीए बोर्ड के समक्ष में इस प्रस्ताव रखा जाएगा।


दरअसल एलडीए द्वारा आश्रयहीन योजना के तहत बसंतकुंज हरदोई रोड पर आश्रयहीन लोगों के लिए एक हजार मकान बनवाए गए थे। इस योजना के तहत जमीन का अधिग्रहण शुरू से ही विवादित था और मकान बनने के बाद आसपास के दबंग लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। दूसरी तरफ एलडीए ने यह मकान वहां के लिए आवेदन करने वालों को भी आवंटित कर दिए गए। करीब 16 साल से मूल आवंटी कब्जे के लिए अभी भी भटक रहे हैं।


मूल आवंटी अपने आशियाने के लिए एलडीए के चक्कर काट रहे थे। वहीं पूर्व वीसी सत्येंद्र यादव ने गत नवंबर 2016 में बोर्ड बैठक में आश्रयहीन योजना के तहत कब्जे में चल रहे 306 भवनों को वहां पर कब्जेदारों को ही देने का प्रस्ताव बना डाला। इस प्रस्ताव को पूर्व वीसी द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया और फिर बोर्ड से उसकी सहमति भी ले ली गई। इसका अनुमोदन प्रमुख सचिव सदाकांत ने भी कर दी। पूर्व वीसी के संरक्षण में हुए इस खेल को दि राइजिंग न्यूज से प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद अब एलडीए ने अगली बैठक में इस फैसले पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है।


सड़क पर ही गरीब


आश्रयहीन योजना के सैकड़ों मूल आवंटी पिछले साल बेघर ही कर दिए गए। उसके बाद से ही ये तमाम आवंटी एलडीए में चक्कर काट रहे हैं। मगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। यह प्रकरण पिछले एलडीए द्वारा आयोजित जनता अदालत में उठ रहा था लेकिन निदान नहीं हो रहा था। अब एलडीए के अधिकारी एक बार फिर से बोर्ड के फैसले पर विचार करने तथा नैसर्गिक न्याय के आधार पर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर मूल आवंटियों को उनका हक दिलाने पर विचार कर रहा है।


"पूर्व वीसी तथा प्रबंधन द्वारा किन परिस्थितियों में मूल आवंटियों को बेदखल कर कब्जे को मकान आवंटित करने का प्रस्ताव पास किया गया, यह समझ से परे हैं। यह किसी तरह से उचित भी नहीं दिखता है। इस प्रस्ताव पर विधिक राय ली जा रही है और बोर्ड के समक्ष ही इसे रखकर इस पर फैसला किया जाएगा। ताकि मूल आवंटियों को उनका हक मिल सकें।"

जयशंकर दुबे

सचिव, एलडीए


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