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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

लेसा मे साल दर साल बढ़ रहे संदिग्ध उपभोक्ताओं की खोज के लिए अब मध्यांचल विद्युत वितरण निगम कमेटी बनाएगा। यह कमेटी लेसा के सभी वितरण क्षेत्रों में उन उपभोक्ताओं को खोजेगी, जिनका अता पता बिजली विभाग को भी नहीं है। कमेटी अब इनकी तलाश करेगी और उसके बाद दस्तावेजों के आधार पर उनसे राजस्व वसूली कराएगी। इसका फैसला मध्यांचल प्रबंधन द्वारा किया गया है।

 

दरअसल लेसा के विभिन्न खंडों में संदिग्ध उपभोक्ताओं की आड़ में बड़ा खेल चल रहा है। इसमें अभियंताओं से लेकर कर्मचारी तक शामिल हैं। दरअसल जो उपभोक्ता तीन चार साल पहले तक लेसा में दर्ज थे, वह अब लापता हो गए हैं। खास बात यह है कि फिक्टीशियस खातों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते तीन सालों में भी करीब डेढ़ उपभोक्ता लापता हो गए। ऐसा तब हुआ जब शहर की भौगोलिक स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ। अलबत्ता मकानों के स्थान पर बड़े बहुमंजिला आपर्टमेंट खड़े गए। खास बात यह है कि शहर के बीच बने अधिसंख्य अपार्टमेंट के कनेक्शन तो जारी किए गए लेकिन कभी ये देखने की कोशिश नहीं की गई कि जिन मकानों को जमींदोज कर अपार्टमेंट बना, वे कहां गए। इसके पीछे अभियंताओं का भ्रष्टाचार ही मुख्य कारण है।

एक अपार्टमेंट की आड़ में दर्जनों मकान गायब

अमीनाबाद, चौक, विक्टोरिया स्ट्रीट, चौपटिया, ठाकुरगंज, हुसैनगंज. बख्शी का तालाब, आलमबाग आदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ताबड़तोड़ वैध –अवैध अपार्टमेंट खड़े हो रहे हैं। इनकी आड़ में पुराने कनेक्शन गायब हो रहे हैं। खास बात यह है कि जहां अपार्टमेंट खड़े हो रहे हैं, उन्ही इलाकों में फिक्टीशियस कनेक्शन भी ज्यादा हैं। उल्लेखनीय है कि फिक्टीशियस खातों के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला भी सामने आ चुका है बावजूद इसके लेसा में इस पर लगाम नहीं लग पाई। ऐसा तब हो रहा है, जब मीटर रीडिंग से लेकर बकाया वसूली तक काम ठेके पर कराया जा रहा है। यानी सालों का उपभोक्ता के न मिलने की बात शुरू में ही सामने आ जानी चाहिए लेकिन उसके बजाए लेसा दफ्तर में बैठ कर बिल भी छाप लेता है और उपभोक्ता का लापता भी करार देता है।

पूर्व में हो चुकी है सीबीआई जांच की मांग

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के सेवानिवृत्त प्रबंध निदेशक उदय नारायण ने फिक्टीशियस उपभोक्ताओं के नाम पर सौ करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला होने की आशंका जाहिर करते हुए उसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी लेकिन भ्रष्टाचार में डूबे पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने इस पर जरा भी ध्यान नहीं दिया। इसकी का फायदा लेसा कर्मी उठाते रहें और फिक्टीशियस का खेल निर्बाध चल रहा है। लेसा के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिन वितरण खंडों मसलन बख्शी का तालाब,  अलीगंज, गोमतीनगर और अमीनाबाद व हुसैनगंज में फिक्टीशियस उपभोक्ता हर साल बढ़ रहे हैं। ऐसे में अहम सवाल यही है कि आखिर यह कैसे हो रहा है लेकिन इसकी जवाबदेही से सभी बच निकलते हैं।

"संदिग्ध व लापता उपभोक्ताओं की तलाश के लिए कमेटी गठित की जा रही है। यह कमेटी इन उपभोक्ताओं को खोजेगी और उनके न मिलने पर उनके पते के आधार पर राजस्व वसूली करेगी। इसमें जिला प्रशासन को रिपोर्ट देकर उनसे वसूली प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।"

अरविंद सिंह

अधिशासी अभियंता

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम

 

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