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दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

कृष्‍णानगर में हुए पुलिस एनकाउंटर की थ्‍योरी काफी कुछ बीते दिनों आई एक फिल्‍म पर आधारित दिखाई दे रही है। अंतर केवल इतना है कि वहां पर एक निरीह का एनकाउंटर किया गया था, लेकिन राजधानी की मुस्‍तैद पुलिस ने झुंझुनूं राजस्‍थान से चार डकैतों को लखनऊ लाने की बात कही। इन्‍हें डकैत भी करार दिया गया और फिर शनिवार को पुलिस के साथ डकैतों की मुठभेड़ भी हो गई। इस एनकाउंटर से पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

खास बात यह है कि पुलिस के तमाम अधिकारी इस बारे में नहीं बता पा रहे हैं, जबकि खुद एसएसपी ने एक टीम द्वारा चार डकैतों को झुंझुनूं से पकड़ करलाने का दावा किया था। हालांकि अब यह लापता हो गए हैं।

 

 

राजधानी पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने कई टीमें बनाईं। जिसमें क्राइम ब्रांच से लेकर, सर्विलांस टीम, स्‍थानीय पुलिस और एएसपी सहित कई अधिकारी शामिल थे। यह अधिकारी लगातार अपराधियों को पड़कने के लिए प्रयासरत भी थे। नए पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने पदभार संभाला तो घटनाओं को लेकर उन्‍होंने गहरी नाराजगी दिखाई थी। इसके कुछ ही दिन बाद डीजीपी ने लखनऊ जोन के एडीजी अभय प्रसाद और आइजी रेंज जय नारायण सिंह का ट्रांसफर कर दिया। इसी बीच राजधानी पुलिस ने दो जनवरी को झुंझुनू राजस्‍थान से चार डकैतों को पकड़कर लखनऊ लाने का दावा भी किया।

 

 

इसके एक ही दिन बाद कृष्‍णानगर थाना क्षेत्र में डकैतों से पुलिस की मुठभेड़ भी हो गई। आमने-सामने की गोलीबारी में पुलिस ने चार डकैतों को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई। पुलिस ने इनके नाम महेश उर्फ महेंद्र बावरिया, मनोज बावरिया,  राजेश उर्फ पेटला बावरिया और रमेश उर्फ राजू बावरिया बताए। सबसे आश्‍चर्य की बात तो यह है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी राजस्‍थान के रहने वाले हैं। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इसे गौरवशाली क्षण करार दिया था। हालांकि जिन चार डकैतों को राजधानी लाने का दावा किया गया था अब उनका कोई अता-पता नहीं चल रहा। इस तरह चार आरोपी  अचानक कहां गायब हो गए इसकी जानकारी अधिकारियों के पास भी नहीं है। हालांकि पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की बात जरूर मानी है।

 

 

इनाम की चाह में नोएडा एनकाउंटर-

बीती रात नोएडा में हुए इनकाउंटर के बाद यूपी पुलिस अब सवालों के घेरे में आ गई है। परिजनों ने आरोप लगाया कि इनाम की चाह में पुलिस ने सेक्टर-122 में एक दरोगा ने जितेंद्र यादव की कार रोककर उनकी गर्दन में गोली मार दी। वहीं दूसरे युवक के टांगों में गोली मारकर घायल कर दिया, जबकि पीड़ित युवक अपनी बहन की सगाई से लौट रहा था। मामले पर एसएसपी लव कुमार ने बताया कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था। ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर विजय दर्शन ने अपनी व्‍यक्तिगत दुश्मनी के कारण घटना को अंजाम दिया। आरोपी ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर और तीन अन्‍य पुलिसकर्मियों को जेल भेजते हुए जांच शुरू की गई है। वहीं पूरे मामले पर पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने रिपोर्ट तलब की है। 

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