Abram Shouted At Photographers For No Pictures

दि राइजिंग न्यूज़

संजय़ शुक्ल

लखनऊ।

 

दो बड़े टीवी और लैपटॉप की मांग से चर्चा में रहे प्रदेश के एक कद्दावर मंत्री सिधार्थ्नाथ सिंह 2.3 किलोवाट के स्वीकृत विद्युत लोड पर दस गुना ज्यादा यानी करीब 23 किलोवाट बिजली प्रयोग कर रहे हैं। वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के घर का कनेक्शन 3.12 किलोवाट का है लेकिन वहां इस्तेमाल हो रही है करीब 17 किलोवाट बिजली। यह एक-दो मंत्रियों का मामला नहीं है बल्कि एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के आवास पर बिजली का इस्तेमाल हो रहा है। खास बात यह है कि आम उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी से बचने की नसीहत देने वाली सरकार के मंत्री क्या कर रहे हैं, इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।

 

आम उपभोक्ताओं की बिजली खपत की निगरानी तथा बिजली चोरी पर लगाम लगाने के लिए बिजली थाने खोलने की कवायद शुरू कर दी गई है लेकिन जो लोग यह व्यवस्था कर रहे हैं, उनके अपनी असलियत सामने आई तो सभी दंग रह गए। प्रदेश सरकार के मंत्री मोती सिंह के यहां पांच किलोवाट के सापेक्ष में 11 किलोवाट, मंत्री सत्यदेव पचौरी के यहां दस किलोवाट के कनेक्शन कप 18 किलोवाट बिजली, कृषि मंत्र सूर्य प्रताप शाही के यहां दस किलोवाट लोड पर 16 किलोवाट की खपत हो रही है।

इसी तरह से नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के आवास पर दस किलोवाट के भार के सापेक्ष में 17 किलोवाट, गन्ना मंत्री सुरेश राणा के दस किलोवाट के लोड के सापेत्र में 18 किलोवाट बिजली का इस्तेमाल हो रहा है। मंत्री धर्म सिंह सैनी के आवास पर करीब तीन किलोवाट के स्वीकृत लोड पर 26 किलोवाट बिजली इस्तेमाल हो रही है तो मंत्री एसपी बघेल के यहां पर साढ़े तीन किलोवाट के स्वीक़त लोड पर छह किलोवाट बिजली का इस्तेमाल हो रहा है। खास बात यह है कि बिजली आपूर्ति की यह सुविधा लेने में नेता प्रतिपक्ष एवं सपा नेता राम गोविंद चौधरी भी पीछे नहीं है। उनके यहां भी चार किलोवाट स्वीकृत लोड के सापेक्ष में 29 किलोवाट बिजली की खपत हो रही है।

 

माननीयों के यहां बिजली की डिमांड देखकर बिजली विभाग के अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पर सरकारी कालोनियों, मंत्री आवासों पर बकायों को लेकर कई बार हंगामा हुआ और अब खपत सामने आई तो फिर अभियंताओं की घिग्घी बंध गई है। लेसा के अधीक्षण अभियंता वीके राय के मुताबिक मंत्री आवासों पर बिजली की खपत स्वीकृत लोड से कहीं ज्यादा मिली है और इस बावत सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जो बकाया था, उसका काफी हद तक राज्य संपत्ति विभाग द्वारा भुगतान कर दिया गया है और अब जिन मंत्रियों के आवासों का लोड ज्यादा मिला है, उन्हें नोटिस देकर उनका लोड बढ़ाया जाएगा और इसकी नियमानुसार पैसा जमा कराया जाएगा।

जैसे उपभोक्ता-वैसी सजा  

बिजली विभाग के किस तरह से उपभोक्ता की हैसियत देखकर काम करता है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मंत्री आवासों में दस गुना तक बढ़ा हुआ लोड बताता है। अभियंताओं का कहना है कि मंत्री आवासों पर जब से लोड बढ़ा मिला है, उसके बाद से ही उनसे चार्ज किया जाएगा। इस बावत नोटिस भी दिए जा रहे हैं लेकिन आम उपभोक्ता के लिए यह नियम बदल जाता है। दरअसल आम उपभोक्ता के यहां पर लोड ज्यादा होने पर सीधे छह महीने या साल भर का नोटिस दिया जाता है। उसके बाद सेटलमेंट के नाम पर जमकर धांधली होती है।

 

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement