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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

मलिहाबाद के आम काश्तकार परवेज के कई बाग हैं। इस बार बौर बंपर थी। उम्दा फसल होने की आशा में खुश भी बहुत थे। मगर सारी खुशी वक्ती साबित हुई। बौर आने क बाद उन्होंने फसल को कीटनाशकों से बचाने के लिए बाग की घुलाई कीटनाशकों से कराई। पांच हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से बाग की धुलाई भी हुई, लेकिन नकली कीटनाशकों के कारण धुलाई के तीन चार दिन बाद ही दोबारा आम पर कीट पनपने लगे।

इसके बाद फिर धुलाई कराई गई, लेकिन नकली कीटनाशकों के कारण कीड़ों तो खत्म नहीं हुए अलबत्ता सत्तर फीसद से ज्यादा फसल जरूर खराब हो गई। लिहाजा जो किसान उम्दा बौर के कारण इस बार खुश नजर आ रहे थे, वे मायूस हैं।

दरअसल, यह समस्या किसी एक किसान की नहीं है बल्कि मलिहाबाद फलपट्टी क्षेत्र में तमाम किसान इसी समस्या से परेशान हैं। खास बात यह है कि सरकारी इमदाद, बिजली-पानी जैसी समस्याओं से झेल रहे फलपट्टी क्षेत्र के नजदीक रहमान खेड़ा में आम उप्पोषण संस्थान भी है। दर्जनों वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मौजूद हैं, लेकिन सामान्य किसानों और उनके बीच कोई संवाद ही नहीं है। नतीजा यह है कि किसान परंपरागत रूप से काम कर रहे हैं और संस्थान अपने हिसाब से।

 

 

महिलाबाद के ही आम काश्तकार नीरोज हसन खां उर्फ मुन्ना भाई बताते हैं कि आम की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान नकली कीट नाशकों से हो रहा है। किसान अपने हिसाब से फसल पर कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। बेहतर फसल और कीटों से बचाव के लिए बेहतर से बेहतर कीटनाशक का इस्तेमाल होता है। एक बार की धुलाई में हजारों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन नकली कीटनाशकों के कारण फसल खराब होती है। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है। इसकी शिकायत भी कई बार की गई, लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।

 

 

नकली जहर का चोखा धंधा

किसानों के मुताबिक फलपट्टी क्षेत्र में नकली कीटनाशकों (जहर) का जमकर कारोबार हो रहा है। पूरे फलपट्टी क्षेत्र में हर तरीके के किसान हैं और बड़े रकबे में आम के बाग हैं। बागों की धुलाई के लिए किसान वहां से कीटनाशक लेते हैं और फिर धुलाई कराते हैं। जनवरी से लेकर मई तक पूरे क्षेत्र में कीटनाशकों की मांग भी बढ़ जाती है। इसी के चलते जमकर असली-नकली जहर का धंधा होता है। प्रशासन व उप्पोषण संस्थान की उदासीनता के कारण यह कारोबार साल दर साल फलफूल रहा है।

प्रधानमंत्री को भेजा पत्र

आम उत्पादकों के मुताबिक फलपट्टी क्षेत्र में पहले से ही तमाम समस्याएं झेल रहे किसानों की दिक्कतें और नकली कीटनाशकों के संबंध में मैंगो ग्रोवर्स एसोसिशएन के अध्यक्ष इंसराम अली द्वारा प्रधानमंत्री व केंद्रीय कृषि मंत्री तथा जिला प्रशासन को कई पत्र दिए गए, लेकिन इस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि फलपट्टी क्षेत्र में नकली कीट नाशकों का कारोबार कहीं ज्यादा तेजी से पनप रहा है।

 

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