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जेल में वन टू वन @ रुपये 3000

     
  
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  • चंद नोटों के लिए ताख पर पहुंच जाते हैं सुरक्षा के तमाम कानून
  • पुराने सजायाफ्ता से लेकर कांस्टेबिल तक लिप्त हैं खेल में

case of corruptions in jail in meeting with prisoners

दि राइजिंग न्यूज़

आशीष सिंह

लखनऊ।


स्‍थान- गोसाईगंज की नई जेल

समय- सोमवार सुबह करीब सवा नौ बजे


राजधानी के जिला कारागार के बाहर बंद कैदियों से मुलाकात करने के लिए उनके परिवारजनों की लाइन लगी हुई थी। जेल में कैदी से मुलाकात बहुत ही मशक्कत का काम है लेकिन जेल कर्मी इसमें भी कई तरह की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसी ही सूचनाओं पर सोमवार सुबह दि राइजिंग न्यूज ने जिला जेल में मुलाकात में होने वाले इस खेल को जानने की कोशिश की।


हमारे संवाददाता ने कैदी से मुलाकात के लिए जेलकर्मी से अंदर पहुंचने और कुछ क्षण एकांत में बात करने की इच्छा जाहिर की। जानकर हैरत होगी कि उनकी मंशा से जेल कर्मी चौंके नहीं बल्कि उन्होंने ऐसी मुलाकात को साधारण सा काम बताकर उसका सुविधा शुल्क बता दिया।


जिला जेल के गेट पर तैनात आरक्षी इंदरपाल से जब एकांत में मुलाकात की बावत दरयाफ्त की गई तो उन्होंने कहा कि पर्ची लेकर मिलने में बीस रुपये खर्च होंगे। अगर एक हजार रुपये खर्च करेंगे तो सीधे जेल अंदर बैरक तक जाकर मुलाकात करा दी जाएगी। इससे भी बेहतर और एकांत में मुलाकात चाहते हैं तो रुपये तीन हजार खर्च होंगे।


तीन हजार रुपये के खर्च में जेल के कमरे में कैदी को लाकर मुलाकात कराई जाएगी। दोनों के बैठने की माकूल व्यवस्था होगी और इत्मिनान के साथ पूरी बातचीत की जा सकती है। यानी तीन हजार रुपये में आराम से किसी भी कैदी से मुलाकात।


जेल आरक्षी के इस बयान ने ही जेल में सुरक्षा के तमाम दावों की कलई खोल कर रख दी। सवाल यह है कि क्या जेल में मुलाकातियों का कोई रिकार्ड नहीं बनता। यही नहीं, इस वसूली में कौन कौन हिस्सेदार हैं। आरक्षी तो इसमें  ऊपर से नीचे तक सबका हिस्सा होने का दावा करता है औऱ यही कारण है कि व्यवस्था निर्बाध चल रही है।


हालांकि इसके बाद अब महानिरीक्षक जेल पीके मिश्रा से इस बावत जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो वह खुद भी असहज नजर आने लगे। उन्होंने इसके साक्ष्य सामने आने पर कार्रवाई का भी दम भरा।


तीन हजार में पूरी व्‍यवस्‍था


 

कांस्‍टेबल इंद्रपाल ने बताया कि जेल में तुंरत मिलने के लिए 3000 रुपये का खर्च आता है। इसमें कैदी से मिलने के लिए पर्ची बनवाने से लेकर कैदी से मिलने तक की स्‍पेशल व्‍यवस्‍था की जाती है। पर्ची बनने के बाद आगंतुक को मुख्‍य द्वार से कारागार के अंदर ले जाया जाता है। यहां पर बने स्‍पेशल कमरे में उस व्‍यक्ति को बैठा दिया जाता है। इसके बाद यहां पर कैदी को लाया जाता है। दोनों लोगों को बैठने के लिए कुर्सी आदि की व्‍यवस्‍था होती है।

 

दोनों के बीच ना तो कोई दीवार होती है और ना ही बातचीत में कोई रोंकटोक या पहरेदारी अर्थात खुलकर दरबार कीजिए और चाहे जिस वारदात पर चर्चा कीजिए। अगर 3000 रुपये नहीं हैं तो भी उसे घबराने की जरूरत नहीं है। उसके लिए 1000 रुपये में दूसरा विकल्प है। इसमें उसे पहले जैसी सुविधाएं तो नहीं मिल पाती हैं लेकिन मनचाहे समय के अनुसार भेंट जरूर हो जाती है।

 

ऊपर से नीचे तक बंटती है रकम


पूरी वसूली पर इंद्रपाल ने बताया कि 1000 रुपये वाली सुविधा पर 800 रुपया बड़े अधिकारियों तक जाता है और 200 रुपया सिपाही आपस में बांट लेते हैं। यदि इस आंकड़े को मान लिया जाए तो 3000 रुपये में 2400 रुपये ऊपर तक जाता है और 600 रुपए आपस में बांटें जाते हैं।

 

आईडी नहीं है तो भी जुगाड़

 

नियमानुसार आगंतुक को किसी भी कैदी से मिलने के लिए अपना पहचान पत्र लाना होता है। लेकिन यदि यह भी नहीं है तो भी जुगाड़ सेट है। 100 रुपया खर्च करिए और जिससे चाहें उससे मिलिए। उल्‍लेखनीय है कि यह सेटिंग सजायाफ्ता पुराने कैदी करते हैं। सोमवार को मलिहाबाद से एक दंपती किसी कैदी से मिलने आए थे। उनके पास कोई आईडी नहीं थी। इस पर उन्‍होंने अपनी समस्‍या बताई तो सजायाफ्ता कैदी ने उनकी समस्‍या 100 रुपये में हल कर दी।

 

कारागार में आगंतुकों से वसूली का मामला बेहद गंभीर है। पूरा प्रकरण अभी तक मेरी जानकारी में नहीं था। इसकी जांच करवाई जाएगी और दोषियों को कठोर से कठोर दंड़ दिया जाएगा। इतना ही नहीं आरोपियों को तत्‍काल सस्‍पेंड करते हुए जेल भेजा जाएगा। पूरा परिसर सीसीटीवी से लैस है हालांकि अभी तक ऐसी बात सीसीटीवी पर नहीं आई। सीसीटीवी को भी चेक करवाता हूं कि कहीं वह खराब तो नहीं कर दी गई हैं।




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