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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

टैक्स बढ़ाने के लिए सरकार ने जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लगा दिया है लेकिन इस नई करप्रणाली को लागू करने के लिए सरकारी ढिलाई का नतीजा यह है कि पूरा बाजार नंबर दो के कारोबारियों के हाथ में चला गया है। अभी तक ई वे बिल की खिलाफत कर रहे ट्रांसपोर्टर व एजेंट सड़क व रेल के जरिए धड़ल्ले से दूसरे राज्यों से माल लेकर आ रहे हैं और सरकारी महकमे फिलहाल जांच स्थगित होने की दलील दे रहे हैं। नतीजा यह है कि बाजारों में बड़े पैमाने पर स्टाक होर्डिंग शुरू हो गई है।

कारोबारी लिहाज से सबसे ज्यादा बिक्री का समय नवरात्र से दीपावली त्योहार के बीच होता है। अमूमन इस दौरान सभी तरह के व्यापार में इजाफा आता है। घर की साज –सफाई से लेकर सुख समृद्धि व दीपावली पूजन तक के बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है। इस बार जीएसटी लागू किए जाने के कारण फिलहाल सरकार ने जांच आदि  को शिथिल कर दिया है। नतीजा यह है कि व्यापारियों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है। बर्तन से लेकर वस्त्रों तक के कारोबारी बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से माल मंगा रहे हैं। रास्ते में जांच न किए जाने की घोषणा के कारण ट्रांसपोर्टर भी अब बिना बिल  माल लेकर धड़ल्ले से चल रहे हैं और एवज में भाड़ा कुछ ज्यादा ले रहे हैं।

सूखे मेवे से लेकर इलेक्ट्रानिक्स तक का धड़ल्ले से परिवहन

 

दूसरे राज्यों से माल मंगाने के लिए 16 अगस्त तक बिल की अनिवार्यता न होने के कारण खाद्यान्न से लेकर सूखा मेवा, किराना, रेडीमेड वस्त्र, इलेक्ट्रिक सामान आदि बड़े पैमाने पर मंगाया जा रहा है। सुपारी, कत्था सहित पूर्वोत्तर भारत से आने वाली इलायची, लौंग आदि भी बड़े पैमाने पर लखनऊ पहुंच रही है। इसी तरह से राजधानी से बर्तन आदि दूसरे राज्यों को भेजे जा रहे हैं। खास बात यह है कि एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच माल परिवहन के लिए जीएसटी के तहत ई वे बिल का प्रावधान है लेकिन फिलहाल यह भी लागू नहीं है। इस कारण से बाजारों में धड़ल्ले से कारोबार चल रहा है। प्रमुख बाजारों में दिन भर लोडिंग-अनलोडिंग का खेल चल रहा है। इसमें ट्रांसपोर्टर भी कमा रहे हैं और माल उतारने वाले क्षेत्र की पुलिस की भी कमाई हो रही है।

16 अगस्त तक छूट

 

ट्रक आपरेटर्स एसोसिशएन के सदस्यों के मुताबिक फिलहाल 16 अगस्त तक दूसरे राज्यों से आने वाले माल के लिए ई वे बिल गत 26 जुलाई से लागू होना था लेकिन व्यवस्था अपूर्ण होने के कारण इसे अब 16 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है। इस कारण से सभी तरह के माल की बुकिंग हो रही है। व्यापारियों द्वारा बिल दिया जा रहा है, उसी पर बुकिंग की जा रही है।

बीस फीसद बढ़ गए रेट

 

सरकार ने नियमों को शिथिल किया है लेकिन अवैध कारोबारी की अनुमति नहीं दी है। इसका फायदा वाणिज्य कर विभाग की जांच इकाई के अधिकारी उठा रहे हैं। रेलवे स्टेशन से लेकर राजधानी में कई स्थानों पर खुलेआम वसूली का खेल रहा है। जहां पर अधिकारी प्रति नग वसूली कर रहे हैं। वसूली न मिलने पर कारोबारियों को परेशान किया जा रहा है और उन्हें बिल की कमियां बताई जा रही है। इसके एवज में बीस फीसद ज्यादा तक रकम वसूली जा रही है। चारबाग स्टेशन पर ही प्रति नग निकलवाई छह रुपये तक वसूले जा रहे हैं। वहां से यह माल सुरक्षित शास्त्रीनगर, नाका और आर्यनगर स्थित गोदामों में पहुंच रहा है। जहां से उन्हें बाजारों में पहुंचाया जा रहा है।

"ट्रांसपोर्टरों अब बिना बिल का माल भी बुक कर रहे हैं। एवज में भाड़ा ज्यादा ले रहे हैं। इसी के चलते व्यापारी भी बिल लेने को तैयार नहीं है। बस सामान खरीद रहे हैं। इससे एक असहज स्थिति बन गई है। दूसरे राज्यों तक माल का परिवहन हो रहा है। ऐसे में सरकार को राजस्व चपत लगना तय है। राजस्व घटने के बाद सरकार की सख्ती का डंडा भी पंजीकृत कारोबारियों को भी झेलना होगा।"

हरिश्चंद्र अग्रवाल

कार्यवाहक अध्यक्ष

लखनऊ व्यापार मंडल

 

"जीएसटी लगने के बाद प्रदेश सरकार को राजस्व की चपत लगना तय है। कारण है कि जो जीएसटी वसूला जा रहा है, उसमें आधा केंद्र को मिल रहा है और आधा प्रदेश को। इसके साथ ही पीछे से बिक्री करने वाली फर्म द्वारा आईटीसी क्लेम करने पर उसका टैक्स वापस हो जाएगा। इस लिहाज से सरकार को पहले के मुकाबले करीब नब्बे फीसद कम टैक्स मिलेगा।"

मनोज त्रिपाठी

अध्यक्ष वाणिज्य कर सेवासंघ

 

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