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लाइसेंस दिखाएं प्रदूषण प्रमाणपत्र पाएं

Rising At 8am | 15-Nov-2017 | Posted by - Admin
  • आरसी-बीमा के बिना जारी हो रहा प्रमाणपत्र
  • वाहन माडल व अंदाजे से ही हो रही धुएं की टेस्टिंग
  • परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उदासीनता
   
Case of Corruption in Issuing of Pollution Control Certificate

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

आईटी चौराहे पर पेट्रोल पंप के बाहर लगा प्रदूषण जांच केंद्र। लकड़ी के डिब्बे में बैठे युवा और बाहर खड़े दो तीन दोपहिया वाहन। पहली नजर में दोनों युवकों ने गाड़ी देखी, पूछा पेट्रोल से ही चलती है। हामी मिलने के बाद उन्होंने वाहन का नंबर डाला और साइन कराए और अधिकृत कोड (691) डाला और जारी कर दिया। किसी ने वाहन के साइलेंसर में पाइप लगाने की जहमत तक नहीं उठाई। प्रमाणपत्र जारी हुआ तो उसमें न दिखने लायक मोहर पहले से लगी हुई थी। अब किसने जांच की, कैसे जांच की कोई पता नहीं लेकिन तीस रुपये ले लिए गए। इस रसीद पर परिवहन विभाग की हेल्पलाइन 18001800151 जरूर दर्ज था।

जिज्ञासावश वाहन चालक ने परिवहन विभाग की हेल्पलाइन पर संपर्क किया। शाम करीब 5:35 बजे हेल्पलाइन पर उपस्थित कर्मी सूरज ने फोन उठाया। बिना साइलेंसर की जांच प्रमाणपत्र जांच की बावत बताया गया कि वाहन की आयु देखकर ही प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। उसमें धुआं या साइलेंसर की जांच की आवश्यकता ही नहीं है। 


दरअसल यह उदाहरण है प्रदूषण के नाम पर चल रहे गोरखधंधे का। यानी केवल कागज के नाम पर प्रदूषण प्रमाणपत्र की आवश्यकता है वर्ना गाड़ी कोई धुआं उगले किसी को कुछ लेना देना नहीं है। राजधानी के देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित घोषित होने के बाद इसकी पड़ताल
दि राइजिंग न्यूज ने बुधवार दोपहर की। मगर इससे परिवहन विभाग में प्रदूषण जांच के नाम पर चल रहे गोरखधंधे का खुलासा हो गया। सवाल यह है कि आखिर इन प्रदूषण जांच केंद्रों की आवश्यकता ही क्या है। अगर वाहन किसी निर्धारित आयु सीमा तक प्रदूषण नहीं करते हैं तो फिर पूरे देश में हो हल्ला क्यों हो रहा है।

प्रदूषण जांच केंद्र यानी सुनियोजित लूट

दरअसल प्रदूषण जांच केंद्रों के चलाने का ठेका परिवहन आयुक्त कार्यालय से दिया जाता है लेकिन जांच केंद्र कितने अपग्रेड हैं, इसकी जानकारी खुद परिवहन अधिकारियों तक को नहीं है। अधिसंख्य जांच केंद्र तो तमाम गैरसरकारी संगठनों के अधीन हैं और इनके यहां केवल वसूली का खेल चल रहा है। कमाई बढ़िया है, इस कारण से परिवहन विभाग की प्राविधिक शाखा द्वारा इनकी जांच के बारे में सोचा तक नहीं जाता है। एवज में कुछ न कुछ उन्हें भी पहुंचता रहता है। उसका प्रत्यक्ष नमूना राजधानी में बढ़ता प्रदूषण है। कुल कितने स्थान पर प्रदूषण जांच केंद्र हैं और वहां किन वाहनों की जांच के क्या उपकरण हैं, इसकी जानकारी खुद राजधानी की आरटीओ को ही नहीं है।

"यह प्रकरण बहुत गंभीर है। बिना वाहन की जांच के प्रमाणपत्र जारी नहीं किया सकता है। इस संबंध में जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जिम्मेदार एजेंसी द्वारा संचालित प्रदूषण जांच केंद्रों को निरस्त कराया जाएगा।"

अशोक कुमार

संभागीय परिवहन अधिकारी

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