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यूपी में परीक्षा का "ब्लैक बोर्ड"

Rising At 8am | 20-Nov-2017 | Posted by - Admin
  • नकल माफियों का भगवाकरण
  • राजकीय कॉलेज छोड़ वित्तविहीन स्कूल बना दिए परीक्षा केंद्र
   
Case of Changes in Exam Center for Board Examination 2018

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

उत्तर प्रदेश बोर्ड की दसवीं व बारहवीं की परीक्षा तो है, लेकिन इस बार सरकारी स्कूल दरकिनार कर वित्तविहीन स्कूलों को सेंटर बना दिया गया। नकल माफिया की सरपरस्ती कुछ ऐसी रही कि उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा के महकमे में ही ऑनलाइन परीक्षा केंद्र निर्धारित करने की प्रणाली में ही सेंधमारी हो गई।

 

 

पिछले साल के मुकाबले करीब पचास फीसद ज्यादा वित्तविहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया। खास बात यह है कि इसमें सरकार के राजकीय कॉलेज तथा अनुदान प्राप्त स्कूलों को दरकिनार कर दिया गया। इस बार 16 सहायता प्राप्त सरकारी स्कूल तथा सात राजकीय कॉलेजों में परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि नए 44 वित्तविहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया है।

 

मामला सामने आने के बाद बोर्ड परीक्षा केंद्र में नकल माफिया के हावी होने के आरोप लगने लगे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक के पास भी 60 से अधिक आपत्तियां पहुंच चुकी हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ ने बोर्ड परीक्षा केंद्रों वित्तविहीन स्कूलों से हटाए न जाने पर आंदोलन की चेतावनी दे दी है।

 

 

दरअसल, प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने का दम भरा था। मुख्य़मंत्री की घोषणा के बाद ऐसा लगा भी था कि इस बार नकल माफिया बाहर हो जाएंगे। सरकार ने पारदर्शिता के लिए परीक्षा केंद्रों का आवंटन कंप्यूटर द्वारा किए जाने की घोषणा की थी।

 

अब परीक्षा केंद्र घोषित हुए तो नकल माफिया की कारगुजारी भी सबके सामने आ चुकी है। राजधानी में ही सात राजकीय कॉलेज हैं जिन्हें इस बार परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया। इसी तरह से सहायत प्राप्त 16 स्कूलों को भी परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर कर दिया गया। कई कॉलेजों में क्षमता से भी कम बच्चों को रखा गया है, जबकि वित्तविहीन स्कूलों पर जमकर कृपा बरती गई।

 

 

दिख रहा है नकल माफिया का प्रभाव

माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों का आरोप है कि बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सूची नकल माफिया के इशारे पर की गई है। इसके लिए ऑनलाइन प्रणाली में भी सेंधमारी की गई।

खास बात यह है कि यह विभाग स्वयं उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा का है और ऐसे में नकल माफियाओं का भगवाकरण कम से कम सरकार के दावों की कलई जरूर खोल रहा है। यही नहीं जो कालेज परीक्षा केंद्र बनाए जाने के काबिल नहीं है, आखिर सरकार उन्हें सहायता क्यों दे रही है।  

 

 

चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला संरक्षक एवं प्रदेश मंत्री आरपी मिश्र ने कहा कि नकल माफिया प्रभाव के कारण ही इस बार शासनादेश को दरकिनार कर राजकीय कॉलेजों व सहायता प्राप्त स्कूलों को परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर कर दिया गया। इस संबंध में पांच दर्जन से ज्यादा आपत्तियां जिला विद्यालय निरीक्षक को मिल चुकी है।

यह सीधे तौर पर भ्रष्ट अधिकारियों व नकल माफिया के गठजोड़ का नतीजा है। ऐसे स्कूलों से परीक्षा केंद्र हटाए नहीं गए तो शिक्षक संघ चरणबद्ध आंदोलन करेगा।

 

 

टेक्नीनिशयन न होना बताया जा रहा है कारण

ऑनलाइन व्यवस्था के तहत सभी स्कूलों को परीक्षा केंद्रों को ऑनलाइन अपना डाटा भेजना था। मगर तमाम सहायता प्राप्त स्कूलों व राजकीय कालेजों में कंप्यूटर टेक्नीशियन है ही नहीं।

सूत्रों के मुताबिक इसका फायदा नकल माफियों ने उठाया। इसी के चलते सुनियोजित तरह से वित्तविहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनवा दिया गया जबकि सरकारी स्कूलों को बाहर कर दिया गया।

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