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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सरकार के आदेशों का अधिकारी किस तरह से मखौल बनाते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण राजधानी का आरटीओ दफ्तर है। परिवहन मंत्री के आदेश के बाद यहां पर कर्मचारियों की हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था की गई लेकिन खास बात यह है कि इससे अधिकारियों को अलग कर दिया गया। संभागीय निरीक्षकों तक की हाजिरी लगती है लेकिन फिर एआरटीओ व आरटीओ की हाजिरी नहीं लगती है। यानी अधिकारियों के लिए उपस्थिति उनकी सुविधा अनुसार। खास कर प्रवर्तन शाखा के अधिकारियों के लिए तो दफ्तर महज टाइम पासिंग हो गया यानी सुविधा पहुंचे और न पहुंचे तो भी ठीक। हालांकि संभागीय परिवहन अधिकारी अशोक कुमार सिंह हाजिरी सभी की लगाए जाने की बात कहते हैं लेकिन क्यों नहीं होती, इसका जवाब नहीं देते हैं।

दरअसल मंगलवार को आरटीओ दफ्तर में दोपहर एक बजे तक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) थी न दोनों सहायक संभागीय अधिकारी (प्रवर्तन)। यात्रीकर अधिकारी जरूर दफ्तर पहुंचे थे। इस दौरान पहुंचे विभाग के सेवानिवृत्त अपर आयुक्त भी संभागीय परिवहन अधिकारी की बावत पता करते रहें लेकिन पता नहीं लगा सकें। यही हाल सहायक संभागीय अधिकारियों (प्रवर्तन शाखा) का था। खास बात यह है कि अमूमन प्रवर्तन शाखा के अधिकारियों की दिनचर्या में ही कुछ इसी तरह की है। हालांकि विभागीय मामला होने के कारण प्रशासनिक शाखा के अधिकारी कुछ कहने भी मना कर देते हैं लेकिन। मगर प्रवर्तन दलों की लोकेशन भी नहीं बता पाते हैं। हालांकि मुख्यालय पर तैनात एक अपर आयुक्त इसे संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) के स्तर का प्रकरण बताते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ही इसमें हस्तक्षेप की बात कहते हैं।

मुख्यमंत्री के आदेश की धज्जियां

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कार्यालयों में अधिकारियों कर्मचारियों को ठीक समय पर दफ्तर में उपलब्ध कहने के निर्देश कई बार जारी किए। इसका हर हालत में अनुपालन करने के आदेश भी दिए लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारी इसे नहीं मानतें। नतीजा यह है कि वाहन पकड़ने जाने या जब्त होने की स्थिति में अपना चालान छुड़ाने पहुंचने वालों को कई कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वजह है कि प्रवर्तन शाखा के अधिकारी अमूमन दफ्तर में मिलते ही नहीं है जबकि प्रशासनिक शाखा के अधिकारी संबंधित दस्तावेज न होने की बात कह कर वापस कर देते हैं। प्रवर्तन अधिकारियों के दफ्तर आने का वक्त भी कोई नहीं बता पाता है।

कई बार खुल चुकी है पोल

मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि अधिकारी दफ्तर में नहीं है तो उनकी लोकेशन जरूर दफ्तर पर होनी चाहिए। यह भी नहीं हो रहा तो गलत है। इस संबंध में जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा ही सवाल उठते रहे हैं। दो दिन पूर्व स्वंय प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने शहीद पथ पर वाहनों की जांच की और वाहनों की स्थिति और प्रवर्तन अधिकारियों की शिथिलता पर खासा नाराजगी भी जाहिर की थी। राजधानी में अवैध वाहनों की बढ़ती तादाद और बदहाल स्कूली वाहन परिवहन विभाग के प्रवर्तन दलों की कार्यप्रणाली का प्रमाण हैं।

बायोमेट्रिक हाजिरी सभी की लगनी चाहिए। इसमें अधिकारियों को क्यों शामिल नहीं किया गया, इसे देखा जाएगा। जो लोग कार्यालय के वक्त दफ्तर में नहीं है, उनकी लोकेशन तो जरूर होनी चाहिए। इसे सुनिश्चित कराया जाएगा।

अशोक कुमार

संभागीय परिवहन अधिकारी

 

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