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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदेश में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली का अंदाजा सोमवार को परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह की समीक्षा बैठक से ही लगाया जा सकता है। स्कूली वाहनों को लेकर मंत्री जी ने सख्त जांच अभियान चलाने तथा राजधानी की सभी स्कूल बसों –वैन की जांच करने के आदेश दिए थे। आदेश के अनुपालन में दोनों ही संभागीय अधिकारी मुस्तैद दिखाई दिए। आदेश का पालन करने का दम भरा गया लेकिन अगले ही दिन यानी मंगलवार को एक भी वाहन की जांच नहीं की गई। जांच में लगे प्रवर्तन अधिकारी ओवरलोडिंग अभियान का हवाला देते रहे तो सात दिन में सभी वाहनों की जांच करने का दम भरने वाली आरटीओ रणनीति तय करने की दलील देती रहीं।

दरअसल, राजधानी में करीब दस हजार स्कूली वाहन संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 1400 स्कूल बसें, 7000 से अधिक स्कूल वैन हैं। इनके अलावा करीब दो हजार अवैध वाहन स्कूली बच्चे लेकर चल रहे हैं। इनमें प्राइवेट बिना स्कूल परमिट की वैन, टेंपो व बैट्री रिक्शा तक शामिल हैं। परिवहन विभाग की उदासीनता के चलते इन वाहनों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। स्कूलों के अंदर पहुंचने वाली वैनों में भी निर्धारित संख्या से डेढ –दो गुना तक बच्चे बैठाए जा रहे हैं लेकिन सुरक्षाकर्मियों की कमी व संसाधनों के नाम पर अधिकारी इनकी जांच से पल्ला झाड़ लेते हैं।

 

परमिट में ही फर्जीवाड़ा

राजधानी में स्कूली वाहन अपने आप में सरकारी राजस्व को चपत लगाने का फर्जीवाड़ा है। दरअसल किसी भी निजी वैन को स्कूल परमिट केवल स्कूल के साथ अनुबंध के आधार पर दिया जाता है। मगर आरटीओ दफ्तर में भ्रष्टकर्मियों की मिलीभगत से स्कूल तो दूर कोचिंग व इंजीनियरिंग कालेज के नाम पर परमिट दिए गए हैं। पिछले दिनों कानपुर रोड पर एक इंजीनियरिंग कालेज की बस के हादसाग्रस्त होने के वक्त उसमें काफी छोटे बच्चे मिले थे। इसी तरह से सभी मिशनरी स्कूलों में बच्चों पहुंचाने वाली तमाम वैन किसी दूसरे कालेज या ट्यूशन पढ़ाने वाले संस्थान के नाम पर परमिट लिए हुए हैं।

नतीजा यह रहता है कि जांच में इन वाहनों के पकड़े जाने पर स्कूल पल्ला झाड़ लेते हैं। विभाग भी स्कूलों की किसी तरह की जिम्मेदारी फिक्स नहीं कर पाता है। खास बात यह है कि इस मामले में कई बार जांच के आदेश दिए गए लेकिन सारा खेल फिटनेस ग्राउंड से ही हो जाता है। जहां केवल सुविधाशुल्क के नाम पर ही बिना अनुबंध पत्र, वाहन की स्थिति देखे ही फिटनेस जारी हो रही है। यही हाल सीएनजी किट रिपोर्ट का भी है।

 

परिवहन मंत्री ने स्कूली वाहनों की जांच के लिए आदेश दिया है। बच्चों से जुड़ा मामला होने के कारण विभाग भी इसे गंभीरता से ले रहा है और स्कूली वाहनों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में सुरक्षा के सभी मानकों की जांच की जाएगी। अगर कमी मिली तो वाहन का परमिट रद किया जाएगा। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं होगी।

अनिल कुमार मिश्रा

उप परिवहन आयुक्त

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