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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

शहर में ट्रैफिक की अस्‍त-व्‍यस्‍त है और चारों ओर ई-रिक्‍शा के कारण जाम हो रहा है। इससे नि‍पटने के लि‍ए परिवहन विभाग भले ही मौन साधे रहा हो, लेकिन सोमवार को यातायात माह के तहत पुराने लखनऊ में बैट्री चालकों की जांच हुई तो 99 प्रतिशत रिक्‍शाचालक यातायत के नियमों के विरुद्ध संचालित पाए गए। किसी के पास ट्रेड लाइसेंस नहीं था तो किसी में क्षमता से अधिक सवारी बैठी थीं।

 

 

इस पूरे अभियान के बाद परिवहन विभाग का भ्रष्‍टाचार भी सामने आ गया। आलम यह है कि जिन ई-रिक्‍शा कारोबारियों को परिवहन विभाग लाइसेंस जारी करता है उनकी जांच के लिए आज तक कोई प्रक्रिया ही नहीं अपनाई गई और ना ही एक भी नियम विरुद्ध वाहनों का लाइसेंस रद्द किया गया। इतना ही नहीं नियमों को ताख में रखकर ई-रिक्‍शा बेचने वालों के खिलाफ भी परिवहन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।

 

 

शहर के ठप पड़ते ट्रैफिक में ई-रिक्शा का बड़ा योगदान है। मुख्‍य मार्गों को जोड़ने के लिए शुरू किए ई-रिक्‍शा आज शहरभर की गलियों से लेकर मुख्‍य मार्गों तक धड़ल्‍ले से दौड़ रहे हैं, जबकि अधिकतर के पास ना तो रिक्‍शा चलाने का लाइसेंस है और ना ही प्रशिक्षण लेने का कोई अनुभव। घूस और वसूली के चलते इनके फर्जी लाइसेंस तक जारी हो जाते हैं। आरटीओ ऑफिस में भी दलालों की ऐसी लॉबिंग है कि बाहर ही काउं‍टर लगाकर लर्निंग लाइसेंस में रिक्‍शा फाइनेंस तक कर रहे हैं।

 

 

सीओ चौक डीपी तिवारी ने जब इनके खिलाफ अभियान चलाया तो कुछ यही हकीकत सामने आई। अब ऐसे दुकानदारों को भी चिन्हित किए जाने की भी योजना है जो बिना रजिस्‍ट्रेशन, बिना लाइसेंस और बिना प्रशिक्षण कार्य पूरा किए वाहन बेच रहे हैं। ऐसे व्‍यापारियों पर अंकुश लगने से जहां ट्रैफिक की सेहत पर भी असर पड़ेगा तो वहीं लोगों को भी जाम से निजात मिलेगी।

 

 

जिलाधिकारी अध्‍यक्षता में गठित है कमेटी

जिलाधिकारी की अध्‍यक्षता में एक कमेटी भी गठित है। जिसमें परिवहन विभाग, यातायात विभाग और प्रशासनिक अधिकारी कई पहलुओं पर गौर करते हुए कार्रवाई करते हैं। इनमें वाहनों में कितनी सवारी बैठेंगी, किस रूट पर ई-रिक्‍शा चलेंगे और किस तरह से इन पर रोक लगाई जाएगी। हालांकि परिवहन विभाग और यातायात विभाग की शिथिलता का ही परिणाम है कि ई-रिक्‍शा की समस्‍या दिन–प्रतिदिन ध्‍वस्‍त होती जा रही है।

अक्‍सर ही दोनों विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहते हैं। रही बात दोनों विभागों के संयुक्‍त अभियान की तो यह भी दूर की ही कौड़ी नजर आती है।

 

 

“यातायात माह के अंतर्गत आज के अभियान में 90 फीसदी ई-रिक्‍शा बिना ट्रेड लाइसेंस और रूट के पकड़े गए। हालांकि इन दोनों को सुनिश्चित करने का काम परिवहन विभाग का है। इसलिए पुलिस ज्‍यादा कुछ नहीं कर सकती। बिना लाइसेंस और रजिस्‍ट्रेशन के मानकों को ना पूरा करने वाले ई-रिक्‍शा व्‍यापारियों के खिलाफ सूची तैयार होगी और इसी के आधार पर एक्‍शन होगा।”

डीपी तिवारी

सीओ चौक

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