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पहले बिक्री का फंडा और अब सरकार का डंडा

Rising At 8am | 18-Oct-2017 | Posted by - Admin

 

 

  • नंबर दो के बाजार ने उड़ाई कारोबारियों की नींद
  • बिक्री को लेकर भी संशय
   
Business of Lucknow Market in Dhanteras

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

धनतेरस पर बाजारों में उम्दा कारोबार हुआ। मीडिया ने भी राजधानी में कारोबार का आंकलन 15 अरब से अधिक का किया लेकिन देखने वाली बात यह है कि सरकार के खजाने में इस बिक्री से कितना टैक्स पहुंचेगा। दरअसल जिस तरह से धनतेरस के दिन कारोबार बताया गया, उससे सरकार को एक दिन में उतना टैक्स मिलेगा जितना सामान्य रूप से एक महीने में नहीं मिलता। यही नहीं सराफा दुकानों पर हुई बिक्री ने सरकार की नींद उड़ा दी है। व्यापारियों के सुर्खियों में रहने का यह फंडा इस बार उन्हें सरकारी डंडे की चपेट में लाने के संकेत दे रहा है। दीपावली के बाद कई कारोबारियों पर कार्रवाई के आसार भी बनते दिख रहे हैं।

 

सरकारी सूत्रों के मुताबिक कामर्शियल टैक्स विभाग ने बड़ी बिक्री का दावा करने वाले कारोबारियों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। कारण है कि वाहनों की रोड टैक्स व बिक्री का टैक्स आनलाइन जमा हो जाता है। इसके अलावा बाकी कारोबारी अपना टैक्स मासिक या तिमाही अदा करते हैं। इस कारण विभाग ने भी मानीटरिंग शुरू कर दी है। मोबाइल फोन की करोड़ों में बिक्री का दम भरने वाले कारोबारी कितना टैक्स अदा कर रहे हैं, इसका भी आंकलन शुरू हो गया। दरअसल वास्तव में यह कारोबारी जितनी बिक्री का दावा कर रहे हैं, उतनी अपने एक महीने की बिक्री नहीं दिखा रहे हैं। यही हाल सराफा कारोबारियों का भी है।

बैंकों से सोने की बिक्री न के बराबर होने और स्टाक में दर्ज मात्रा से अधिक सोने की बिक्री से यह ट्रेड अपने आप ही संदिग्ध हो गया है। दरअसल करवाचौथ और उसके बाद धनतेरस पर बड़ी –बड़ी बिक्री का दावा किया गया। अपर आयुक्त कामर्शियल टैक्स ने बताया कि जीएसटी के तहत किसी माल की बुकिंग होने पर भी टैक्स लग जाता है और आर्डर कैंसिल हो जाने पर भी टैक्स काटने का प्रावधान है। इस काऱण से बुकिंग के दावों की कलई रिटर्न में सामने आ जाएगी। इसके लिए अमीनाबाद, महानगर, आलमबाग, चौक और हजरतगंज के कई प्रतिष्ठान के रिटर्नों की गहन जांच की जाएगी। दरअसल कारोबारियों ने जो बिक्री का दावा किया है, उससे सापेक्ष में टैक्स कई गुना ज्यादा आना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो फिर दाल कहीं जरूर काला है।

 

करोड़ों के पटाखे, धेला भर टैक्स

 

धनतेरस पर पटाखा कारोबारियों ने पांच से आठ करोड़ रुपये तक पटाखों की बिक्री होने का दम भरा। सवाल यह है कि यह पटाखे कहां से आए और उनकी खरीद पर कितना टैक्स विभाग को मिला, यह अभी सामने नहीं आया है। कामर्शियल टैक्स विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पटाखा कारोबारियों द्वारा अमूमन 12-15 लाख रुपये टैक्स मिलता है। अब एक दिन में ही करोड़ों रुपये के पटाखे बिके हैं तो इससे इस पूरे कारोबार का गोरखधंधा अपने आप साफ हो जाता है। हालांकि कामर्शियल टैक्स विभाग ने जल्द ही इन कारोबारियों के खिलाफ जांच का दावा किया है।

खूब चला टैक्स चोरी का बाजार

 

धनतेरस व दीपावली के बाजार में इस बार टैक्स चोरी का माल बेचने वाले कारोबारी ही मौज में दिखे। जांच व छापेमारी के अभाव के कारण हर बाजार में चीन निर्मित उत्पादों की धूम रहीं। मोबाइल मार्केट से लेकर बच्चों की बंदूक, घर सजाने में इस्तेमाल होने वाली झालरों से लेकर कंदील, वंदनवार सब सामान चीन निर्मित ही भरा दिखा। खास बात यह है कि ये तमाम उत्पाद टैक्स चोरी के थे और बिना बिल मंगाए थे। बाजारों में भी इनकी खरीदारी करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा रहीं।

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