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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सोमवार वसंत पंचमी के दिन राजधानी में सिटी बसें नहीं चलीं। सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी के कर्मचारी अपने वेतन व अन्य मांगों को लेकर हड़ताल –कार्य बहिष्कार पर रहें। मगर खामियाजा भुगता राजधानी के लाखों लोगों ने। खास बात यह है कि लोग परिवहन साधन के लिए भटक रहे थे तो रोडवेज प्रशासन मंत्री जी की खिदमत और मंगलवार को होने वाले कैंप की तैयारी में जुटा रहा। जो लोग इन बसों पर नियमित सफर करते हैं लेकिन सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी ने कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं कीं। नतीजा यह है कि निजी सिटी बसें और टेंपो –आटो के सहारे लोग अपने दफ्तर –घर पहुंचे। कई मार्गों पर जमकर ज्यादा किराया वसूली भी हुई लेकिन रोकटोक करने वाला भी कोई नहीं था।

सिटी बसों की हड़ताल का सबसे ट्रांसगोमती क्षेत्र में देखने को मिला। लोगों को दफ्तर तक पहुंचना मुश्किल हो गया। शाम को कार्यालय समाप्त होने के बाद हजरतगंज चौराहा, पालीटेक्निक चौराहा, अशोक मार्ग पर लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। इसका फायदा निजी बसों तथा आटो रिक्शा वालों ने भी खूब उठाया। जिस दूरी का किराया रविवार को दस रुपये था, वहां के भी पंद्रह वसूले गए। यही नहीं, सवारियां भी तीन जगह पांच व छह बैठाकर। इसी तरह से 24 व 28 सीटर निजी सिटी बसों में भी पचास –साठ सवारियां बैठाई गईं। भाड़ा भी पहले वसूल लिया गया और मना करने वालों को बस में चढ़ने तक नहीं दिया गया।

उधर हड़ताल के चलते लोग बहुत परेशान रहे लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहे। राजधानी में करीब दो सौ सिटी बसें संचालित होती है लेकिन दुबग्गा व गोमतीनगर दोनों ही डिपो से बसों का संचालन नहीं हुआ। कर्मचारियों ने मांगे पूरी होने तक बसों का संचालन शुरू न करने की चेतावनी दी है। ऐसे में आगे स्थिति क्या होगी, यह देखने वाला होगा।

बैट्री रिक्शा के भी भाव बढ़े

अमूमन पांच व दस रुपये का भाड़ा लेकर चलने वाले बैट्री रिक्शा भी हजरतगंज से महानगर तक के सौ व डेढ़ सौ रुपये भाड़ा लेते दिखे। साधन का अभाव होने के कारण लोगों ने पूल करके इनका उपयोग किया। वहीं हजरतगंज, चारबाग व सिस गोमती इलाकों में टेंपो भी दिन भर 14 -14 सवारियां लेकर फर्राटा भरते दिखे।

यानी प्रशासन को करना था इंतजाम

लखनऊ ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रबंध निदेशक आरिफ सकलैन ने बताया कि सिटी बसों की हड़ताल व कर्मचारियों द्वारा कार्यबहिष्कार किए जाने की सूचना जिला प्रशासन व जिलाधिकारी को दे दी गई थी। ऐसे में बसों के बंद होने से लोगों को किसी तरह की दिक्कत न होने पाएं, इसे सुनिश्चित कराने का दायित्व उनका भी था। लोगों को दिक्कत हुई यह खेद की बात है।

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