Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

   

पहले लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जैसे महापुरुषों की जयंती और उनके जरिए राजनीतिक हित साधने के बाद अब भाजपा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाल गंगाधर तिलक को लेकर तिलक महोत्सव मनाने जा रही है। इसका आयोजन 30 दिसंबर को विधान सभा के तिलक सभागार में होगा। दरअसल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक ने तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा नारा दिया था। इस नारे को भी सौ साल पूरे हो गए हैं। अब भाजपा इन नारे का शताब्दी वर्ष पर बाल गंगाधर तिलक की जयंती मनाने जा रही है।

भाजपा नेताओं के मुताबिक 30 दिसंबर को होने वाले इस आयोजन मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही भाजपा के कई बड़े नेता शामिल होंगे। बाल गंगाधर तिलक का स्वतंत्रता आंदोलन में अमूल्य योगदान रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो धड़ो में नरम दल व गर्म दल में टूट गई थी। स्वंतत्रता आंदोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक जेल भी गए। जेल से छूटने के बाद वर्ष 1916 में उन्होंने होम रूल की स्थापना की। होम रूल की पहली वर्षगांठ पर वर्ष 1917 में उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। हम इसे लेकर रहेंगे। बालगंगाधर तिलक के इस ओजस्वी भाषण के जरिए लोगों की चेतना को जागृत किया था। अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि  राजनीति का विज्ञान ही देश का वेद है। आपकी आत्मा है और मैं इसे सिर्फ जागृत करना चाहता हूं।

अब अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के जरिए भाजपा ने एक बार फिर महफिल लूटने की तैयारी कर ली है। इसी क्रम में तिलक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले गुजरात में लौहपुरुष सरदार वल्लभ की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाने तथा जयंती आयोजित करने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर करारा प्रहार किया था। इस आयोजन को लेकर दोनों दलों में लंबे समय तक एक दूसरे पर कटाक्ष किए और भाजपा इस मुद्दे को भुनाने भी सफल रही थी। अब एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गर्मदल के नेता केशव बाल गंगाधर तिलक महोत्सव को लेकर भी भाजपा कुछ इसी तरह की रणनीति पर काम करती दिख रही है। भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि जिन अमर स्वंतत्रता सेनानियों के जरिए हमें आजादी मिलीं, उनके प्रति श्रद्धा दिखाना कोई गलत नहीं है। बाल गंगाधर तिलक के योगदान को नकारा नहीं जा सकता और आजादी के आंदोलन में उनके दिए नारे स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है .. हर जुबां पर था। इस ओजस्वी योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इसके पहले तो किसी ने ऐसा नहीं किया और अब अगर आयोजन हो रहा है तो उसमें कमी निकालने का औचित्य नहीं है।

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