Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्यूज़

संजय़ शुक्ल

लखनऊ।

 

प्यार और जंग में सब जायज वाली कहावत की तर्ज पर भारतीय जनता पार्टी अब संयुक्त गठबंधन को उनके ही विभीषणों से भेदने की कवायद में लग गई है। दरअसल, यह बात उस वक्त सामने आ गई जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय ने एक कार्यक्रम में इस बात के संकेत दिए कि विपक्षी दल के नेता भाजपा की नीतियों में विश्वास करते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। यानी भाजपा ने अपनी ओर से चारा डाल दिया है। उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद राजनीति भी गर्मा गई है।

 

दरअसल उपचुनावों में करारी हार और उससे भी ज्यादा सपा –बसपा गठबंधन से उत्पन्न स्थितियों को भाजपा बाखूबी भांप रही है कि आने वाले चुनाव आसान नहीं होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति और खास कर चुनाव में धर्म और जाति के कार्ड हर सियासी दल खेलता है। ऐसे में मतदाताओं के ध्रुवीकरण होने से भी भाजपा को बहुत ज्यादा सफलता मिलना आसान नहीं दिखता। ऐसे में अब गठबंधन में सेंधमारी की तैयारी हो रही है। यह बात इस कारण भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जुलाई प्रथम सप्ताह में भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी आ रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके आगमन से ही दूसरे दल के कुछ लोगों को भाजपा की सदस्यता दिलाई जा सकती है। इसके पहले भी अमित शाह के दौरों के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था और एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी विपक्षियों को उनके नेताओं के जरिए शिकस्त देने की तैयारी कर रही है।

खोज जमीनी नेताओं की

भारतीय जनता पार्टी विपक्षी दलों के उन नेताओं को टार्गेट कर रही है जो जमीनी स्तर हैं और उनके पास लोगों का समर्थन है। इसके लिए समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी के कुछ नेताओं के नामों को लेकर कयास भी लग रहे हैं। दरअसल भारतीय जनता पार्टी में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेता पहले से ही हैं और अब इन्हीं के जरिए पार्टी विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इसकी जमीन भी तैयार हो चुकी है और अमित शाह के दौरे के दौरान कुछ लोग भाजपा के पक्ष में खड़े दिख सकते हैं।

 

बगावती सुर हुए तेज

भारतीय जनता पार्टी भले ही विपक्षी गठबंधन में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है लेकिन पार्टी में अपने ही सहयोगियों के बगावती तेवर संभलते नहीं दिख रहे हैं। बलिया विधायक सुरेंद्र सिंह और मंत्री ओमप्रकाश राजभर की बयानबाजी परवान चढ़ी है। ओम प्रकाश राजभर तो आने वाले चुनाव में किसके साथ कौन, जैसे बयान देकर चर्चा में है। वहीं बहराइच की सांसद सावित्री देवी फुले तो आरक्षण को लेकर पहले ही केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाती रही हैं। ऐसे में भाजपा के लिए दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में लाने से कहीं ज्यादा दिक्कत तलब अपने ही सहयोगियों को संतुष्ट करना है। हालांकि पार्टी प्रवक्ता इसे घर की बात करार देते हुए इसे ठीक कर लेने का दम भरते दिख रहे हैं लेकिन यह उतना आसान अब दिखाई नहीं दे रहा है।

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