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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

एटा निवासी गिरिराज किशोर और उनकी पत्नी ऊषा मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित जनता दरबार में पहुंचे थे। तमाम बिलों के साथ। दरअसल, वह पुल का निर्माण कराने का ठेका लेते हैं और एटा व राजधानी में डालीगंज पुल के निर्माण में उन्होंने काम किया था। इसका करीब 75 लाख रुपये लोक निर्माण विभाग में बकाया है, जिसके लिए वह पिछले नौ महीने से चक्कर लगा रहे हैं। हर जगह बता रहे हैं कि किस तरह से विभाग के अभियंता व कर्मचारी पहले घूस और बाद में भुगतान की बात कर रहे हैं।

 

 

इसकी जानकारी उप मुख्यमंत्री एवं लोकनिर्माण मंत्री केशव मौर्या से मिलकर उन्हें दीं लेकिन वहां से आश्वासन भर मिला, भुगतान नहीं। आज भी वह प्रदेश सरकार की मंत्री डा. रीता बहुगुणा से मिले लेकिन वहां से आश्वासन मिला। दूसरी तरफ लोकनिर्माण विभाग में अभियंता-कर्मचारी मिलने पर ही कुछ करने की बात कह रहे हैं। वृद्ध दंपत्ती इस बात को लेकर ज्यादा परेशान हैं कि कम से कम यही बात दिया जाएं कि उन्हें भुगतान मिलना है या नहीं।

बुजुर्ग दंपत्ती सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस के दावे की कलई भी खोल देते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पूरी पार्टी भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगाने की दलीलें देते नहीं थक रही है, लेकिन हकीकत कुछ अलग ही दिखाई दे रहे हैं। जनता दरबार में पहुंचे गिरिराज किशोर बताते हैं कि पिछले साल सातवें महीने में उन्होंने जनता दरबार में उन्होंने अपने बकाया भुगतान के लिए दरख्वास्त लगाई थी और उसके बाद से लगातार वह शासन-प्रशासन और विभागों के चक्कर लगा रहे हैं।

 

 

भुक्तभोगी के मुताबिक उन्होंने कई स्थानों पर काम कराया। उसके बाद उन्हें भुगतान नहीं मिला। गिरिराज के मुताबिक उन्होंने पत्नी के नाम पर फर्म बना रखी है और इसी कारण पत्नी भी उनके साथ बकाये को लेकर लोकनिर्माण विभाग से मंत्रियों के जनता दरबार में चक्कर लगा रही है।

अब सबकुछ खुल्लमखुल्ला

दरअसल, सरकार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस के दावों के बाद कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार पड़ा पर्दा भी साफ हो गया है। मेडिकल कॉलेज से लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण तक पहले जो काम ढके छिपे होते थे, वे खुल्लमखुल्ला हो रहे हैं। सरकार चिकित्सा सुविधाओं के बेहतर होने की दावे करते नहीं थक रही है, जबकि हकीकत यह है कि शताब्दी अस्पताल से लेकर ट्रामा सेंटर तक में बाहर की दवाओं की खरीद कराई जा रही है। यह अलग बात है कि वार्डों से लेकर अस्पताल परिसर में दर्जनों प्रधानमंत्री के बैनर लगे हैं और सस्ती औषधियों की प्रचार हो रहा है, लेकिन आपरेशन थियेटर में दाखिल मरीजों को बिस्तर पर ही तमाम दवाएं बाहर के दुकानदार पहुंचा रहे हैं।

 

 

सारा खेल चिकित्सकों की मिलीभगत से हो रहा है। इसी तरह से पूरे शहर में अंधाधुंध निर्माण हो रहे हैं। कार्रवाई करने की डींग हांकी जा रही है, लेकिन अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं और भ्रष्ट अभियंता इससे पोषित हो रहे हैं।

अब छिपा नहीं भ्रष्टाचार

भारतीय जनता पार्टी सरकार में चल रहा कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार का गोरखधंधा अब छिपा नहीं है। पार्टी के ही मंत्री ओमप्रकाश राजभर इसे लेकर कई बार तंज कस चुके हैं। यही नहीं, बहुजन समाजपार्टी छोड़ भाजपा में आए कबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा सुप्रीमो मायावती के कार्यकाल को इससे कहीं बेहतर करार दिया था। बावजूद इसके सरकार भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने में बेबस ही दिखाई दे रही है। आलम यह है कि अधिकारियों अभियंताओं पर पहले से दाग थे, वे कहीं ज्यादा ऊंचे व महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच रहे हैं। सरकार जुबानी भ्रष्टाचार पर लगाम लगा रही है।

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