Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

विधान परिषद चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। खास बात यह है कि प्रत्याशी के नाम के साथ ही सूबे में सियासी समीकरणों को भी महत्व दिया गया है। साथ ही सरकार बनने के बाद अवैध निर्माण से लेकर धोखाधड़ी कर डूब की जमीन का फर्जी मुआवजा लेने वाले पुराने समाजवादी पार्टी से पूर्व एमएलसी बुक्कल अब भाजपा विधान परिषद भेजेगी। बुक्कल के साथ ही समाजवादी पार्टी व बसपा से छोड़कर आने वाले लोगों को भी विधान परिषद का टिकट देकर भाजपा ने अपना सियासी कर्ज भी उतार दिया है।

विधान परिषद की सीट इन लोगों ने छोड़कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई लोगों की राह आसान कर दी थी। अपने कृत्यों के कारण सरकार बनने के साथ ही निशाने पर रहने वाले ये नेता अब भाजपा में है और जिन प्रकरण को लेकर ये सबसे ज्यादा विवाद में थे, दस महीने में वे मामले ठंडे बस्ते में पहुंच गए। इन मामलों में अब पार्टी के नेता भी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं, जबकि समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा में आने वाले नेता अपनी वफादारी की दुहाई देते नहीं थक रहे हैं। यह अलग बात है कि अभी उनकी दगाबाजी को साल भर भी नहीं बीता है, लेकिन अब सभी “सबका साथ-सबका विकास” के नारे लगाते नहीं थक रहे हैं।

दावे हैं दावों का क्या?

भ्रष्टाचार से लेकर अपराध तक अंकुश लगाने तथा कठोर कार्रवाई-स्वच्छ प्रशासन का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी की कलई भी विधान परिषद उम्मीदवारों की सूची से खुल गई है। खास बात यह है कि अपने दाग धोने के लिए दूसरे दल छोड़ने वाले तमाम नेता बिना शर्त भाजपा में आने की दलीलें देते रहें मगर अब हकीकत खुल गई है। खास बात यह रही कि इन सभी का स्वागत स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। विधानसभा प्रचंड बहुमत के चलते अब इनका विधान परिषद सदस्य बनना भी तय माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा की सत्ता लोलुपता भी लोगों के सामने आ गई है।

सियासी समीकरणों का भी रखा ध्यान

विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने दो मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारा है। एक अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा और दूसरे समाजवादी से भाजपा में आए बुक्कल नवाब। उल्लेखनीय यह भी है कि नगर निकाय चुनाव में बुक्कल नवाब के पुत्र को ही पार्षद की टिकट दिया गया था। अब बुक्कल नवाब को टिकट देकर भाजपा ने अपना कर्जा उतारने के साथ ही शिया मुस्लिमों को रिझाने की जमीन तैयार कर ली है। इसी तरह मेरठ से सरोजनी अग्रवाल, जयवीर सिंह, यशवंत सिंह को विधान परिषद पहुंचा कर इनके जरिए भाजपा अपना वोट बैंक साध रही है।

राजनैतिक जानकारों के मुताबिक विधान परिषद में दूसरी पार्टी छोड़कर आए नेताओं को भेजने का मकसद ही 2019 के लिए वोटों को साधना है। यही कारण है कि दागियों पर कार्रवाई का दम भरने वाली भाजपा आज उन्हीं के सहारे अपने राजनैतिक हित साधने में लगी है।

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