Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

कर्नाटक चुनावों के लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अब ब्राह्मण कार्ड भी चल दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के जरिए कर्नाटक में ब्राह्मण तथा नाथ संप्रदाय के लोगों को आकर्षित करने के साथ ही पार्टी ने प्रदेश के कबीना मंत्री बृजेश पाठक और उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा को भी चुनाव प्रचार व सभाओं की जिम्मेदारी दी है। इसकी मुख्य वजह कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की लिंगायतों पर पकड़ को माना जा रहा है। इसी की काट निकालने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनाव प्रचार में उतारा गया है। खास बात यह है कि गुरुवार को अपनी सभाओं में भी योगी आदित्यनाथ अपने संबोधन में नाथ संप्रदाय के बारे में बोले। यहां तक कि उन्होंने उदाहरण सहित दोनों स्थानों की समान मान्यताओं की भी बात कहीं।

दरअसल, कर्नाटक चुनाव को कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिष्ठा प्रश्न बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है। खास बात यह है कि पूरे चुनाव में विकास का मुद्दा फिलहाल गौड़ ही नजर आ रहा है और सियासी दल सारा ध्यान मतों के ध्रुवीकरण पर केंद्रित कर रहे हैं। मकसद मतों को अपने पक्ष में करने का है। भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक में सुस्त विकास और किसानों का मुद्दा बना रही है लेकिन रोजगार और विकास के मुद्दे पर कुछ नहीं बोला जा रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार बनने पर किसानों ऋण माफ करने, लिंगायतों को आरक्षण आदि को केंद्रित कर रही है। यानी दोनों ही दल अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

किसानों और महिलाओं पक्ष में करने की कवायद

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो एप के जरिए किसान व महिलाओं से रूबरू हो रहे हैं और उनसे भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। यह ऐप पिछले साल बनाई गई थी और अब इसका इस्तेमाल चुनाव प्रचार में हो रहा है। नमो एप के जरिए दो दिन पहले प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के किसानों को संबोधित किया। उनकी मदद करने तथा उनके विकास व आय बढ़ाने की प्रतिबद्धता दिखाई। इसीक्रम उन्होंने नमो एप के जरिए महिलाओं को भी संबोधित किया। खास बात यह है कि पार्टी महिलाओं को आकर्षित कर रही है और यह भी एक तरह से ध्रुवीकरण सरीखा है। इसके पहले उत्तर प्रदेश चुनाव में उज्जवला योजना तथा तीन तलाक जैसे विषयों को उठाकर भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की थी। उसी तरह से भारतीय जनता अब कर्नाटक में भी महिला मतदाताओं क रिझाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है।

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